अनाया बांगर की क्रिकेट से लेकर जेंडर ट्रांजिशन और अब क्रिकेट में वापसी तक की कहानी काफी खास है।

अनाया बांगर इन दिनों क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें कम्यूनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति दी है। इसके बाद अनाया ने क्रिकेट में वापसी को लेकर अपनी योजनाओं के बारे में भी बात की है। वह मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में वापसी के लक्ष्य के साथ ट्रेनिंग कर रही हैं।
अनाया की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि क्रिकेट में उनकी शुरुआत पुरुष खिलाड़ी के तौर पर हुई थी। जेंडर ट्रांजिशन के बाद उन्होंने महिला क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और अब एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर वापसी की तैयारी कर रही हैं। आइए जानते हैं अनाया बांगर की जिंदगी, क्रिकेट करियर, जेंडर ट्रांजिशन और परिवार से जुड़ी पूरी कहानी।
मुंबई में हुआ अनाया बांगर का जन्म
अनाया बांगर का जन्म 26 सितंबर 2000 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। जेंडर ट्रांजिशन से पहले उनका नाम आर्यन बांगर था। वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की संतान हैं। क्रिकेट का माहौल उन्हें बचपन से ही घर में मिला। पिता संजय बांगर खुद भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके हैं और घरेलू क्रिकेट में भी उनका शानदार अनुभव रहा है। इसी वजह से अनाया ने कम उम्र में ही क्रिकेट को अपना करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
उन्होंने मुंबई के इस्लाम जिमखाना क्लब से क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया। इसके बाद वह पुडुचेरी की अंडर-16 टीम का हिस्सा बनीं और आगे चलकर मुंबई की अंडर-23 टीम के लिए भी क्रिकेट खेला।
सरफराज खान और यशस्वी जायसवाल के साथ खेल चुकी हैं
अनाया बांगर का घरेलू क्रिकेट से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। अपने शुरुआती क्रिकेट करियर के दौरान उन्होंने कई ऐसे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेला, जो आगे चलकर भारतीय क्रिकेट में पहचान बनाने में सफल रहे। अनाया सरफराज खान और यशस्वी जायसवाल के साथ भी क्रिकेट खेल चुकी हैं। सरफराज खान को वह अपने बचपन के दोस्तों में से एक बताती रही हैं।
साल 2023 में शुरू किया जेंडर ट्रांजिशन
अनाया बांगर की जिंदगी में साल 2023 एक बड़ा बदलाव लेकर आया। इसी दौरान उन्होंने जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया शुरू की।
उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी यात्रा के बारे में लोगों को जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी HRT का सहारा लिया और आगे चलकर जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी करवाई।
अनाया के अनुसार, इस पूरी यात्रा के दौरान उन्हें अपने परिवार का सहयोग मिला। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत यात्रा को सार्वजनिक रूप से साझा करते हुए अपने अनुभवों और चुनौतियों के बारे में भी बात की।
क्रिकेट से दूर होने के बाद फिर वापसी की तैयारी
जेंडर ट्रांजिशन के दौरान अनाया को क्रिकेट से कुछ समय के लिए दूरी बनानी पड़ी। हालांकि उन्होंने खेल को पूरी तरह नहीं छोड़ा। अब वह दोबारा क्रिकेट में सक्रिय होने की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट में वापसी करना है। इसके लिए वह लगातार ट्रेनिंग कर रही हैं और अपनी फिटनेस पर काम कर रही हैं।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने दी कम्यूनिटी क्रिकेट खेलने की मंजूरी
अनाया बांगर को हाल ही में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की पॉलिसी के तहत कम्यूनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति मिली है। इसके लिए उन्हें निर्धारित मेडिकल प्रक्रियाओं और जांच से गुजरना पड़ा।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की नीति महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर मेडिकल और हार्मोन संबंधी मानकों को ध्यान में रखती है। अनाया ने इस प्रक्रिया और महिला खेलों में निष्पक्षता बनाए रखने से जुड़े नियमों का भी जिक्र किया है।
इस फैसले के बाद अनाया एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर दिखाई देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना क्यों मुश्किल है?
अनाया बांगर की कहानी का एक अहम पहलू अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के नियमों से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर ICC की नीति लागू होती है। जिन खिलाड़ियों ने पुरुष यौवन यानी male puberty का अनुभव किया है, उनके लिए महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने पर प्रतिबंध है।
इसी वजह से अनाया के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना संभव नहीं है। हालांकि अलग-अलग क्रिकेट बोर्ड और प्रतियोगिताओं के नियमों में अंतर हो सकता है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के नियमों के तहत अनाया को कम्यूनिटी स्तर पर क्रिकेट खेलने की अनुमति मिली है। इसलिए उनकी मौजूदा क्रिकेट यात्रा ऑस्ट्रेलिया में कम्यूनिटी क्रिकेट से आगे बढ़ रही है।
अनाया बांगर का परिवार
अनाया बांगर का परिवार क्रिकेट से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता संजय बांगर भारत के पूर्व क्रिकेटर हैं। संजय बांगर ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है और क्रिकेट से संन्यास के बाद कोचिंग तथा कमेंट्री समेत क्रिकेट से जुड़े कई क्षेत्रों में काम किया है।अनाया की मां का नाम कश्मीरा बांगर बताया जाता है। उनका एक भाई भी है, जिसका नाम अथर्व बांगर है।
अनाया ने अपनी जेंडर ट्रांजिशन की यात्रा के दौरान परिवार से मिले समर्थन को महत्वपूर्ण बताया है। उनके लिए परिवार का साथ इस पूरी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा रहा।
अनाया की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं
अनाया बांगर की कहानी केवल क्रिकेट में वापसी की कहानी नहीं है। यह अपनी पहचान को स्वीकार करने, व्यक्तिगत बदलावों का सामना करने और अपने पसंदीदा खेल में दोबारा जगह बनाने की यात्रा भी है। क्रिकेट उनके जीवन का बचपन से हिस्सा रहा है। पुरुष क्रिकेट में आर्यन के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने अपनी पहचान में बदलाव किया और अनाया के रूप में नई जिंदगी की शुरुआत की। अब उनका लक्ष्य क्रिकेट के मैदान पर अपनी वापसी को मजबूत करना है।
मार्च 2027 में एलीट क्रिकेट में वापसी का उनका लक्ष्य कितना सफल होता है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से कम्यूनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलना उनके क्रिकेट करियर में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
