छिपकली देखकर कई लोग क्यों घबरा जाते हैं?

आपने कई बार देखा होगा कि कुछ लड़कियां बड़े से बड़े जानवरों के सामने भी सहज रहती हैं, लेकिन जैसे ही दीवार पर एक छोटी-सी छिपकली दिखाई देती है, वे घबरा जाती हैं, चीख पड़ती हैं या तुरंत वहां से दूर हट जाती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ आदत है, अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका संबंध केवल लड़कियों से नहीं बल्कि मानव मस्तिष्क की डर से जुड़ी प्रतिक्रिया से है। यानी यह प्रतिक्रिया किसी भी व्यक्ति में हो सकती है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह।
क्या सिर्फ लड़कियां ही छिपकली से डरती हैं?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि छिपकली का डर केवल लड़कियों तक सीमित नहीं है। कई पुरुष और बच्चे भी छिपकली देखकर घबरा जाते हैं।
हालांकि, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों की वजह से कई बार महिलाओं या लड़कियों में इस डर को अधिक देखा या व्यक्त किया जाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी लड़कियां छिपकली से डरती हैं।
दिमाग कैसे देता है डर की प्रतिक्रिया?
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हमारा मस्तिष्क किसी चीज को संभावित खतरे के रूप में पहचानता है, तो एमिग्डाला नामक हिस्सा तुरंत सक्रिय हो जाता है।
इसके बाद शरीर में “Fight or Flight” यानी लड़ो या भागो प्रतिक्रिया शुरू होती है।
इस दौरान शरीर में—
- एड्रेनालिन बढ़ जाता है।
- दिल की धड़कन तेज हो जाती है।
- सांसें तेज चलने लगती हैं।
- पसीना आने लगता है।
- व्यक्ति घबराहट महसूस करने लगता है।
यही वजह है कि कई लोग छिपकली देखकर तुरंत डर जाते हैं, भले ही उन्हें पता हो कि उससे वास्तविक खतरा बहुत कम है।
असली खतरा नहीं, लेकिन दिमाग ऐसा क्यों सोचता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हमारा दिमाग हमेशा वास्तविक और केवल महसूस होने वाले खतरे में तुरंत अंतर नहीं कर पाता। यदि किसी चीज से जुड़ा डर पहले से मौजूद हो, तो दिमाग बिना ज्यादा सोच-विचार किए उसी तरह प्रतिक्रिया देने लगता है। इसी कारण कई लोगों में छिपकली को देखकर घबराहट अपने आप शुरू हो जाती है।
बचपन के अनुभव भी बन सकते हैं वजह
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार यह डर बचपन में विकसित होता है।
उदाहरण के लिए—
- बचपन में छिपकली से जुड़ा कोई डरावना अनुभव।
- परिवार के किसी सदस्य को छिपकली से डरते देखना।
- बार-बार यह सुनना कि छिपकली खतरनाक होती है।
ऐसी परिस्थितियों में दिमाग धीरे-धीरे उस डर को सीख लेता है।
इसे क्या कहते हैं?
यदि किसी व्यक्ति को किसी खास चीज से जरूरत से ज्यादा डर लगता है, तो इसे Specific Phobia कहा जाता है।
हालांकि छिपकली का फोबिया सांप या मकड़ी के डर जितना आम नहीं माना जाता, लेकिन इसकी मानसिक प्रक्रिया काफी हद तक समान होती है।
छिपकली की हरकत भी बढ़ाती है डर
विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी दिमाग उन जीवों के प्रति अधिक सतर्क रहता है जो—
- अचानक तेजी से दौड़ते हैं।
- बिना चेतावनी के सामने आ जाते हैं।
- जिनकी चाल और शारीरिक बनावट असामान्य लगती है।
छिपकली की तेज गति और अचानक दिखाई देने की आदत कई लोगों में डर की भावना पैदा कर सकती है।
क्या घर की छिपकली खतरनाक होती है?
भारत में घरों में पाई जाने वाली अधिकांश सामान्य हाउस गेको इंसानों के लिए आम तौर पर खतरनाक नहीं मानी जाती। वे मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और अन्य छोटे कीड़ों को खाकर घर के वातावरण को साफ रखने में मदद करती हैं। हालांकि, किसी भी जंगली जीव को हाथ लगाने या परेशान करने से बचना चाहिए।
