UP में बिल्डरों पर सख्ती! 🏠 UP-RERA ने नियम बदले, फंड, विज्ञापन, रिपोर्ट और पजेशन को लेकर नए नियम लागू।

उत्तर प्रदेश में घर या प्रॉपर्टी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP-RERA) ने बिल्डरों और रियल एस्टेट एजेंटों से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों में प्रोजेक्ट के फंड, रिपोर्टिंग, विज्ञापन, एजेंट की ट्रेनिंग और पजेशन समेत कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इन नियमों का मकसद रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ाना और घर खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है।
बिल्डरों को देनी होगी प्रोजेक्ट की रिपोर्ट…..
नए नियमों के तहत बिल्डरों को प्रोफेशनल्स के सर्टिफिकेट के साथ Quarterly Progress Report (QPR) जमा करनी होगी। इससे खरीदारों को प्रोजेक्ट की प्रगति के बारे में जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट से जुड़े लोन की रकम को अलग अकाउंट में रखना होगा और हर वित्त वर्ष में खातों का ऑडिट कराना जरूरी होगा।
खरीदारों से कैश में नहीं लिया जा सकेगा पैसा…..
प्रोजेक्ट के लिए खरीदारों से मिलने वाले पैसों को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं। प्रोजेक्ट की रकम के लेनदेन को निर्धारित बैंक खातों के जरिए करना होगा। प्रोजेक्ट के लिए ट्रांजैक्शन अकाउंट, कलेक्शन अकाउंट और अलग बैंक अकाउंट रखने का प्रावधान किया गया है। इससे फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
एजेंटों के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जरूरी…..
रियल एस्टेट एजेंटों के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। एजेंट को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की जरूरत होगी। इसके अलावा एजेंटों को हर तीन महीने अपने ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी जमा करनी होगी। रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने पर लेट फीस भी लग सकती है।
QPR और रिपोर्ट के लिए फीस…..
नए प्रावधानों के तहत कुछ रिपोर्ट और प्रक्रियाओं के लिए फीस निर्धारित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, QPR के लिए 15,000 रुपये, एजेंट की तिमाही रिपोर्ट के लिए 10,000 रुपये तक और सालाना ऑडिट रिपोर्ट के लिए 25,000 रुपये तक शुल्क हो सकता है।
विज्ञापन में देनी होगी पूरी जानकारी…..
अब रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन में जरूरी जानकारियां देना भी महत्वपूर्ण होगा। विज्ञापन में प्रोजेक्ट की वेबसाइट, UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, कलेक्शन अकाउंट, QR कोड, एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख जैसी जानकारी देनी होगी। साथ ही विज्ञापन में प्रोजेक्ट का नाम वही होना चाहिए, जो स्वीकृत प्लान में दर्ज है।
खरीदारों को मिलेगा शिकायत का विकल्प…..
अगर किसी खरीदार ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी खरीदी है, तो वह भी UP-RERA में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है। इस प्रावधान से ऐसे खरीदारों को अपनी शिकायत संबंधित अथॉरिटी तक पहुंचाने का रास्ता मिल सकता है।
मेंटेनेंस के पैसे को अलग रखना होगा…..
खरीदारों से लिए गए मेंटेनेंस फंड यानी IFMS को बिल्डर को अलग बैंक अकाउंट में रखना होगा। बाद में जब रेजिडेंट्स एसोसिएशन कॉमन एरिया की जिम्मेदारी संभालेगी, तो यह रकम उसे सौंपनी होगी। इस फंड का इस्तेमाल केवल निर्धारित मेंटेनेंस से जुड़े कामों के लिए किया जा सकेगा।
बिल्डर को देनी होगी संपर्क की जानकारी…..
नए नियमों के तहत बिल्डरों को ग्राहकों के लिए कस्टमर रिलेशन मैनेजर और संपर्क या टोल-फ्री नंबर उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर, आर्किटेक्ट और अन्य प्रोफेशनल्स की जानकारी भी देनी होगी। बिल्डर को UP-RERA की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल भी अपडेट रखनी होगी। पार्टनर, ट्रस्टी या इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़ी जानकारी में बदलाव होने पर उसे भी अपडेट करना जरूरी होगा।
प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर भी शुल्क…..
अगर किसी अलॉटी की मृत्यु हो जाती है और प्रॉपर्टी परिवार के किसी सदस्य के नाम ट्रांसफर की जाती है, तो इसके लिए 1,000 रुपये तक की फीस लग सकती है। वहीं परिवार से बाहर किसी व्यक्ति को ट्रांसफर करने पर यह शुल्क 25,000 रुपये तक हो सकता है।
पजेशन देते समय भी नियमों का पालन जरूरी…..
बिल्डर को प्रॉपर्टी का कब्जा देते समय UP-RERA के निर्धारित फॉर्मेट में Offer of Possession जारी करना होगा। इससे खरीदारों को पजेशन प्रक्रिया से जुड़ी औपचारिक जानकारी मिल सकेगी।
घर खरीदारों के लिए क्या है जरूरी…..?
अगर आप उत्तर प्रदेश में घर या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ कीमत और लोकेशन देखकर फैसला न लें। प्रोजेक्ट का UP-RERA रजिस्ट्रेशन, बिल्डर की जानकारी, प्रोजेक्ट की प्रगति, फंड से जुड़ी जानकारी और विज्ञापन में दी गई डिटेल्स जरूर जांचें।
