UCC पर सियासत तेज! 🗣️ राशिद अल्वी ने 21 राज्यों में लागू करने की योजना पर उठाए सवाल और सरकार पर साधा निशाना। जानिए पूरा मामला।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर देश में एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने की बात कहे जाने के बाद कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल…..
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए शासन वाले राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने UCC को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कदम बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या UCC लागू करने से देश की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी या बेरोजगारी जैसी समस्याएं खत्म होंगी।
“क्या UCC से बेरोजगारी खत्म होगी”?……
राशिद अल्वी ने कहा कि सरकार को रोजगार और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या UCC लागू होने से बेरोजगारी खत्म होगी या पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी। अल्वी के मुताबिक, सरकार 21 राज्यों में UCC लागू करने की योजना बना रही है, लेकिन उनके अनुसार इससे आम लोगों की आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
अलग-अलग पर्सनल लॉ का मुद्दा…..
राशिद अल्वी ने UCC के अर्थ पर बात करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सिविल कानूनों में एकरूपता लाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ मौजूद हैं और UCC के जरिए इनमें एकरूपता लाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी के एजेंडे में बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों की जगह ट्रिपल तलाक, UCC और मंदिर-मस्जिद से जुड़े मुद्दे ज्यादा प्रमुख हैं।
UCC पर आगे भी जारी रह सकती है बहस……
UCC लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय रहा है। केंद्र सरकार और बीजेपी इसे समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखती है, जबकि विपक्षी दल इसके प्रावधानों और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अमित शाह के 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में इसे लागू करने के बयान के बाद यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।
