तिलक वर्मा ने जताई भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने की इच्छा।

भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा ने लाल गेंद की क्रिकेट को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की है। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करने के बाद तिलक ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट उनके खून में है और वह भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
दलीप ट्रॉफी में जमकर बोला तिलक वर्मा का बल्ला
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में तिलक वर्मा ने अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने पहली पारी में नाबाद 116 रन की शानदार पारी खेली, जबकि दूसरी पारी में भी उनका बल्ला चला और उन्होंने नाबाद 51 रन बनाए। तिलक की इस शानदार बल्लेबाजी ने उनकी टीम को फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। मैच के बाद जब उनसे टेस्ट क्रिकेट को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि लाल गेंद की क्रिकेट हमेशा से उनकी पसंद रही है।
‘टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरा सपना है’
तिलक वर्मा ने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही लाल गेंद से क्रिकेट खेलना पसंद रहा है। उन्होंने बताया कि भले ही उनका अंतरराष्ट्रीय करियर सफेद गेंद के क्रिकेट से शुरू हुआ, लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका अनुभव काफी पुराना है।
उन्होंने कहा, “मुझे शुरू से ही लाल गेंद से क्रिकेट खेलना पसंद रहा है। मैंने कभी भारत के लिए सीमित ओवरों की क्रिकेट खेलने का सपना नहीं देखा था, लेकिन ईश्वर की यही इच्छा थी।”
तिलक ने आगे कहा कि उन्होंने भारत के लिए टी20 और वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया है, लेकिन लाल गेंद की क्रिकेट उनके मजबूत पक्षों में से एक रही है।
10 साल की उम्र से कर रहे हैं मेहनत
तिलक वर्मा ने अपने क्रिकेट सफर और मेहनत के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि वह कम उम्र से ही क्रिकेट के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शायद जब वह 10 साल के थे, तभी से उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी और अब वह 23 साल के हो चुके हैं। आईपीएल में प्रदर्शन के कारण उन्हें सफेद गेंद के क्रिकेट में पहचान मिली, लेकिन इससे पहले वह लाल गेंद की क्रिकेट में काफी अनुभव हासिल कर चुके थे। युवा बल्लेबाज का मानना है कि घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद से लगातार प्रदर्शन करना उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार कर सकता है।
टी20 और वनडे में व्यस्त रहने से घरेलू क्रिकेट के लिए कम समय
तिलक वर्मा ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन-चार सालों से रणजी ट्रॉफी में खेलने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि भारत के लिए टी20 और वनडे मुकाबलों में व्यस्त रहने की वजह से घरेलू क्रिकेट में उनकी भागीदारी सीमित रही है।
इसके बावजूद तिलक का फोकस साफ है। वह ज्यादा से ज्यादा लाल गेंद की क्रिकेट खेलना चाहते हैं ताकि खुद को टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार कर सकें। तिलक वर्मा ने स्पष्ट किया कि वह लाल गेंद से रन बनाकर भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह घरेलू क्रिकेट में मिलने वाले हर अवसर का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन ही उन्हें टेस्ट टीम की दावेदारी में मजबूत बना सकता है। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में उनकी नाबाद 116 और 51 रन की पारियां इसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा सकती हैं।
सफेद गेंद में बना चुके हैं पहचान
तिलक वर्मा ने आईपीएल में अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई थी। वह भारत के लिए टी20 और वनडे क्रिकेट खेल चुके हैं और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। अब उनकी कोशिश लाल गेंद के क्रिकेट में भी खुद को साबित करने की है। अगर वह घरेलू क्रिकेट में लगातार बड़ी पारियां खेलते हैं, तो आने वाले समय में टेस्ट टीम के चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर जरूर जा सकता है।
तिलक वर्मा के बयान से साफ है कि उनका लक्ष्य सिर्फ सफेद गेंद के क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह टेस्ट क्रिकेट में भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। इसके लिए वह घरेलू क्रिकेट में ज्यादा से ज्यादा लाल गेंद के मुकाबले खेलने और रन बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।दलीप ट्रॉफी में उनका शानदार प्रदर्शन उनके इस लक्ष्य की दिशा में सकारात्मक संकेत है। अब देखना होगा कि आने वाले घरेलू सीजन में तिलक अपने प्रदर्शन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और क्या वह भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने में सफल हो पाते हैं।
