गन्ने के अलावा भी कई चीजों से बनती है चीनी!

भारत में चीनी का इस्तेमाल चाय-कॉफी से लेकर मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और कई तरह के खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर होता है। आमतौर पर जब भी चीनी की बात होती है तो हमारे दिमाग में गन्ने से बनने वाली सफेद चीनी आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीनी या अलग-अलग तरह के मीठे उत्पाद सिर्फ गन्ने से ही नहीं बनते?
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चुकंदर, मीठे ज्वार, खजूर, नारियल के फूल के रस, ताड़ के रस, मेपल के रस और मक्के जैसे कई स्रोतों से भी मिठास तैयार की जाती है। इनमें से कुछ स्रोतों से दानेदार चीनी बनती है, जबकि कुछ से सिरप या दूसरे स्वीटनर तैयार किए जाते हैं।
ऐसे समय में जब भारत में चीनी की कीमतों को लेकर चर्चा तेज है, यह जानना दिलचस्प है कि गन्ने के अलावा कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं और इनमें सबसे सस्ता कौन सा पड़ता है।
चुकंदर से भी बनती है सफेद चीनी
गन्ने के बाद चुकंदर (Sugar Beet) दुनिया में सुक्रोज का एक प्रमुख स्रोत है। यूरोप और अमेरिका के कई हिस्सों में चुकंदर से बड़े पैमाने पर चीनी का उत्पादन किया जाता है। चुकंदर में मौजूद सुक्रोज को औद्योगिक प्रक्रिया के जरिए निकालकर रिफाइन किया जाता है। इससे बनने वाली रिफाइंड चीनी की रासायनिक संरचना गन्ने से बनी रिफाइंड चीनी के समान ही होती है। इसलिए आम उपभोक्ता के लिए दोनों में अंतर पहचानना आसान नहीं होता। हालांकि, चुकंदर की खेती और चीनी उत्पादन की लागत स्थानीय जलवायु, पानी, कृषि व्यवस्था और प्रोसेसिंग सुविधाओं पर निर्भर करती है।
मीठे ज्वार से तैयार होती है मिठास
आमतौर पर ज्वार का इस्तेमाल अनाज के तौर पर किया जाता है, लेकिन मीठा ज्वार (Sweet Sorghum) एक अलग किस्म है। इसके तनों में मीठा रस पाया जाता है। तनों को पेरकर रस निकाला जाता है और उसे उबालकर गाढ़ा सिरप तैयार किया जा सकता है। कुछ प्रक्रियाओं के जरिए इससे क्रिस्टलीकृत चीनी बनाने की भी कोशिश की जाती है। हालांकि, गन्ने और चुकंदर की तुलना में मीठे ज्वार से चीनी का औद्योगिक उत्पादन काफी सीमित है।
खजूर से भी मिलती है प्राकृतिक मिठास
खजूर अपने प्राकृतिक रूप से मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। खजूर के फलों को सुखाकर या पीसकर खजूर पाउडर और अन्य मीठे उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
कुछ क्षेत्रों में खजूर के पेड़ों से प्राप्त रस से भी पारंपरिक रूप से मीठे उत्पाद और सिरप बनाए जाते हैं। खजूर आधारित स्वीटनर का इस्तेमाल खासकर उन लोगों में लोकप्रिय है जो रिफाइंड चीनी के विकल्प तलाशते हैं। हालांकि, खजूर से बने उत्पादों को सीधे सफेद चीनी का समान विकल्प मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इनके स्वाद, बनावट और पोषण संरचना अलग होती है।
नारियल के फूलों के रस से बनती है कोकोनट शुगर
कोकोनट शुगर नारियल के फल से नहीं, बल्कि नारियल के पेड़ के फूलों से निकलने वाले रस से तैयार की जाती है। इस रस को गर्म करके उसमें मौजूद पानी कम किया जाता है और फिर गाढ़ा मीठा उत्पाद तैयार किया जाता है।
इसका रंग आमतौर पर हल्का भूरा होता है और इसमें कैरेमल जैसा स्वाद पाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल मिठाइयों, बेकिंग और पेय पदार्थों में किया जाता है।
हालांकि, इसकी कीमत सामान्य सफेद चीनी से काफी अधिक होती है, इसलिए इसे बड़े पैमाने पर कम बजट वाले स्वीटनर के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल है।
ताड़ के रस से बनती है पाम शुगर
भारत और एशिया के कई हिस्सों में ताड़ के पेड़ों के रस से पारंपरिक रूप से गुड़ और चीनी जैसे मीठे उत्पाद बनाए जाते हैं। रस को इकट्ठा करके उबाला और गाढ़ा किया जाता है, जिसके बाद इसे अलग-अलग रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। पाम शुगर का स्वाद और रंग सामान्य सफेद चीनी से अलग होता है। इसका इस्तेमाल कई पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों में किया जाता है।
मेपल के रस से बनता है मेपल सिरप
कनाडा और अमेरिका के कुछ ठंडे क्षेत्रों में मेपल के पेड़ों से रस निकाला जाता है। इस रस को गर्म करके पानी कम किया जाता है और इससे मेपल सिरप तैयार होता है।
मेपल सिरप का इस्तेमाल खासकर पैनकेक, वॉफल, डेजर्ट और बेकिंग में किया जाता है। यह भारत में रोजमर्रा की चीनी का व्यावहारिक विकल्प नहीं है, क्योंकि इसका उत्पादन सीमित क्षेत्रों में होता है और कीमत भी काफी अधिक हो सकती है।
मक्के से बनते हैं ग्लूकोज और कॉर्न सिरप
मक्का से सामान्य सफेद दानेदार चीनी नहीं बनाई जाती, लेकिन इससे खाद्य उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण स्वीटनर बनाए जाते हैं। मक्के के स्टार्च को प्रोसेस करके ग्लूकोज सिरप और हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनका इस्तेमाल पेय पदार्थों, बिस्किट, कैंडी, सॉस और कई पैकेज्ड फूड उत्पादों में किया जाता है। इस वजह से मक्का आधुनिक खाद्य उद्योग में मिठास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
कसावा और टैपिओका से भी बनते हैं स्वीटनर
कसावा (Tapioca/Cassava) की जड़ों में स्टार्च की मात्रा काफी अधिक होती है। इसी स्टार्च को प्रोसेस करके ग्लूकोज सिरप और अन्य मीठे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। खाद्य उद्योग में टैपिओका स्टार्च का इस्तेमाल केवल मिठास के लिए ही नहीं, बल्कि टेक्सचर और गाढ़ापन देने के लिए भी किया जाता है।
आलू और दूसरी स्टार्च वाली फसलें
आलू जैसी स्टार्च वाली फसलों से भी औद्योगिक प्रक्रिया के जरिए स्टार्च आधारित स्वीटनर तैयार किए जा सकते हैं। स्टार्च को एंजाइम की मदद से छोटे शर्करा अणुओं में बदला जाता है, जिससे ग्लूकोज सिरप जैसे उत्पाद मिलते हैं।
इस तरह से तैयार स्वीटनर का इस्तेमाल मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में होता है।
सबसे सस्ती कौन सी चीनी?
अगर बात भारत में रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली दानेदार सफेद चीनी की हो, तो गन्ने से बनने वाली रिफाइंड चीनी आमतौर पर सबसे किफायती विकल्प है। इसकी कीमत बाजार, शहर, ब्रांड और समय के हिसाब से बदलती रहती है। दूसरी ओर, नारियल चीनी, मेपल सिरप, खजूर आधारित स्वीटनर और दूसरे विशेष उत्पाद सीमित उत्पादन और प्रोसेसिंग लागत के कारण सामान्य चीनी से महंगे हो सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर बाजार में कोकोनट शुगर की कीमत कई बार सामान्य चीनी से कई गुना अधिक हो सकती है। वहीं खजूर या ताड़ आधारित चीनी भी आम सफेद चीनी की तुलना में महंगी मिल सकती है। इसलिए अगर आपका उद्देश्य कम कीमत में रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए चीनी खरीदना है, तो सामान्य गन्ने की चीनी अभी भी सबसे व्यावहारिक विकल्पों में शामिल है।
क्या महंगी चीनी ज्यादा हेल्दी होती है?
यह जरूरी नहीं है कि किसी स्वीटनर की कीमत अधिक होने का मतलब यह हो कि वह स्वास्थ्य के लिए अपने आप बेहतर है। कोकोनट शुगर, डेट शुगर या अन्य प्राकृतिक स्वीटनर में कुछ अलग पोषक तत्व हो सकते हैं, लेकिन ये भी मुख्य रूप से मीठे पदार्थ हैं और इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।
इसी तरह स्टेविया और मंक फ्रूट जैसे लो-कैलोरी या जीरो-कैलोरी स्वीटनर सामान्य चीनी से अलग श्रेणी में आते हैं। इन्हें सीधे चीनी के समान नहीं माना जाना चाहिए।
चीनी की कीमत बढ़ने पर क्या विकल्प हैं?
अगर बाजार में चीनी महंगी हो रही है, तो घरेलू स्तर पर खजूर, गुड़ या अन्य स्वीटनर का इस्तेमाल कुछ व्यंजनों में किया जा सकता है। लेकिन इनकी कीमत और स्वाद अलग होने के कारण इन्हें हर जगह सामान्य चीनी का सीधा विकल्प नहीं माना जा सकता। मिठाई या बेकिंग में किस स्वीटनर का इस्तेमाल करना है, यह रेसिपी, स्वाद और बजट पर निर्भर करता है।
Note: चीनी और स्वीटनर की कीमतें समय, स्थान, ब्रांड, गुणवत्ता और बाजार की स्थिति के अनुसार बदलती रहती हैं।
