
वाशिंगटन, 27 फरवरी। जेडी वेंस मध्य पूर्व युद्ध बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘एयर फोर्स टू’ पर The Washington Post को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में किसी लंबे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा।
‘लंबे क्षेत्रीय संघर्ष की कोई संभावना नहीं’
वेंस ने उन आशंकाओं को खारिज किया कि अमेरिका एक और वर्षों तक चलने वाले संघर्ष में उलझ सकता है। उन्होंने कहा कि भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हों, लेकिन यह मानना गलत है कि अमेरिका बिना अंत के युद्ध में फंस जाएगा।
उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले अभी विचाराधीन हैं, लेकिन ऐसी कार्रवाई के लंबे संघर्ष में बदलने की संभावना बेहद कम है।
कूटनीतिक विकल्प को प्राथमिकता
वेंस ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई या कूटनीतिक समाधान—दोनों विकल्प मौजूद हैं।
“हम सभी कूटनीतिक विकल्प को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि ईरान क्या करता है और क्या कहता है।”
इस बीच जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी रही, हालांकि कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। बातचीत अगले सप्ताह फिर से होने की संभावना है।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर जोर
41 वर्षीय पूर्व मरीन सैनिक वेंस ने कहा कि उनकी विदेश नीति सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने दोहराया कि वे विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों को लेकर सतर्क रुख रखते हैं।
उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ राष्ट्रपति हैं और उनकी नीतियां अमेरिकी जनता के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
अतीत की गलतियों से सीखने की जरूरत
वेंस ने 2003 के इराक युद्ध के बाद से मध्य पूर्व में अमेरिका की लंबी सैन्य मौजूदगी का संदर्भ देते हुए कहा कि अतीत की गलतियों को दोहराने से बचना होगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को सतर्क रहना चाहिए और किसी नए लंबे क्षेत्रीय संघर्ष से बचना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इजरायल को लेकर पार्टी में बहस
मध्य पूर्व नीति और इजरायल के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर आंतरिक मतभेदों पर वेंस ने कहा कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारों को सुना जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने इजरायल को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बताया।
पृष्ठभूमि
संयुक्त राज्य अमेरिका दो दशकों से अधिक समय से मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है, खासकर 2003 में इराक पर आक्रमण के बाद से। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहा है।
यूरोप सहित विभिन्न मंचों पर कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और तनाव को कम करना है।
