हार्ट के मरीजों के लिए कौन-सा तेल बेहतर है—सरसों या ऑलिव ऑयल?

दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में खानपान की अहम भूमिका होती है। खासकर खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हार्ट हेल्थ पर सीधा असर डाल सकता है। भारत में सरसों का तेल लंबे समय से रसोई का हिस्सा रहा है, जबकि ऑलिव ऑयल को मेडिटेरेनियन डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि हार्ट के मरीजों के लिए सरसों का तेल बेहतर है या ऑलिव ऑयल? आइए जानते हैं विशेषज्ञों और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर इसका जवाब।
दिल की सेहत के लिए सही तेल क्यों जरूरी है?
पहले यह माना जाता था कि सभी प्रकार का फैट नुकसानदायक होता है, लेकिन अब विशेषज्ञ बताते हैं कि फैट की मात्रा के साथ-साथ उसका प्रकार भी महत्वपूर्ण होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- ट्रांस फैट से बचना चाहिए।
- अत्यधिक सैचुरेटेड फैट सीमित मात्रा में लेना चाहिए।
- मोनोअनसैचुरेटेड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (PUFA) को संतुलित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
- तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ऑलिव ऑयल क्यों माना जाता है दिल के लिए अच्छा?
विशेष रूप से एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
इसमें मौजूद प्रमुख तत्व—
- मोनोअनसैचुरेटेड फैट (MUFA)
- ओलिक एसिड
- पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट
ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नियमित और संतुलित मात्रा में ऑलिव ऑयल का सेवन अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बनाए रखने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) के ऑक्सीकरण को कम करने में सहायक हो सकता है।
क्या हर भारतीय डिश के लिए ऑलिव ऑयल सही है?
ऑलिव ऑयल के कई फायदे हैं, लेकिन भारतीय खाना पकाने का तरीका अलग होता है।
हमारे यहां—
- तेज आंच पर तड़का लगाया जाता है।
- डीप फ्राई किया जाता है।
- लंबे समय तक खाना पकाया जाता है।
ऐसी स्थिति में एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के कुछ लाभकारी एंटीऑक्सीडेंट तेज गर्मी में कम हो सकते हैं। यदि तेज आंच पर खाना बनाना हो, तो रिफाइंड ऑलिव ऑयल अपेक्षाकृत अधिक तापमान सहन कर सकता है, लेकिन उसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा कम होती है।
सरसों का तेल क्यों है खास?
सरसों का तेल भारतीय रसोई में वर्षों से इस्तेमाल किया जाता रहा है।
इसमें पाए जाते हैं—
- मोनोअनसैचुरेटेड फैट
- अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) यानी पौधों से मिलने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड
ओमेगा-3 शरीर में सूजन कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भूमिका निभा सकता है। कुछ भारतीय अध्ययनों में भी सरसों के तेल के संभावित हृदय संबंधी लाभों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, पारंपरिक सरसों के तेल में एरूसिक एसिड भी पाया जाता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में किया जाए।
हार्ट पेशेंट के लिए कौन-सा तेल बेहतर?
यदि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों की बात करें, तो एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक अध्ययनित विकल्पों में माना जाता है। वहीं भारतीय खानपान और स्वाद के लिहाज से सरसों का तेल भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है, विशेषकर जब इसका उपयोग सीमित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ किया जाए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल तेल बदलने से दिल स्वस्थ नहीं रहेगा। इसके साथ-साथ—
- नियमित व्यायाम,
- धूम्रपान से दूरी,
- संतुलित भोजन,
- पर्याप्त नींद
तेल इस्तेमाल करते समय रखें ये बातें
- एक ही तेल का अत्यधिक उपयोग करने के बजाय संतुलित आहार अपनाएं।
- तेल को बार-बार गर्म न करें।
- डीप फ्राई किए गए भोजन का सेवन सीमित करें।
- कुल तेल की मात्रा पर भी नियंत्रण रखें।
- यदि आपको पहले से हृदय रोग है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार तेल चुनें।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो अपने डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।
