
सानंद (गुजरात), 31 मार्च।
भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी समयसीमा साझा की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को घोषणा की कि साल 2026 तक भारत में चार सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी तरह तैयार होकर काम करना शुरू कर देंगे।
सानंद में दूसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सानंद में केयन्स सेमीकॉन (Keynes Semicon) के ओएसएटी (OSAT) प्लांट का उद्घाटन किए जाने के अवसर पर वैष्णव ने कहा:
“2026 तक चार सेमीकंडक्टर प्लांट तैयार हो जाएंगे और 2027 तक दो और प्लांट का काम पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, भारत की पहली फैब्रिकेशन यूनिट 2028 तक धोलेरा में बनकर तैयार हो जाएगी।”
उन्होंने जानकारी दी कि केयन्स सेमीकॉन की यह यूनिट देश का दूसरा सक्रिय सेमीकंडक्टर प्लांट है। पहला प्लांट माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित है जिसका उद्घाटन 28 फरवरी को हुआ था, जबकि तीसरे प्लांट का उद्घाटन इसी साल जुलाई में प्रस्तावित है।
14 महीनों में उत्पादन का सफर
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केयन्स सेमीकॉन की सानंद यूनिट ने नींव रखने से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक का सफर मात्र 14 महीनों में पूरा किया है। यह गति भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हमारी मजबूती को दर्शाती है।
युवाओं और इंजीनियरों का प्रशिक्षण
भारत के ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन को सफल बनाने के लिए मानव संसाधन पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है:
- प्रशिक्षण: लगभग 60,000 युवा इंजीनियरों को सिनॉप्सिस और कैडेंस जैसे विशिष्ट वैश्विक उपकरणों में प्रशिक्षित किया गया है।
- विश्वविद्यालयों की भागीदारी: 315 विश्वविद्यालयों के इंजीनियर चिप डिजाइन में योगदान दे रहे हैं।
- उन्नत तकनीक: भारत में अब 2 नैनोमीटर जैसी जटिल चिप्स डिजाइन की जा रही हैं। एनवीडिया, एएमडी और इंटेल जैसी वैश्विक कंपनियां भी भारत में उन्नत डिजाइनिंग का काम कर रही हैं।
सेमीकंडक्टर 2.0 और 2047 का लक्ष्य
अगले चरण का जिक्र करते हुए वैष्णव ने बताया कि ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ के तहत प्रधानमंत्री का निर्देश है कि मशीनों, गैसों और रसायनों सहित पूरा इकोसिस्टम भारत में ही उपलब्ध होना चाहिए।
भारत का लक्ष्य:
- 2032 तक: दुनिया के शीर्ष छह सेमीकंडक्टर उत्पादक देशों में शामिल होना।
- 2047 तक: वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन सेमीकंडक्टर देशों में अपनी जगह बनाना।
केंद्रीय मंत्री ने अंत में कहा कि हमें गुणवत्ता और लागत के मामले में वैश्विक स्तर पर जीत हासिल करनी होगी, तभी हम विश्व स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेंगे।
