15 साल के वैभव सूर्यवंशी का बल्ला फिर नहीं चला। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में तेज शुरुआत के बाद Jofra Archer की रफ्तार और घातक बाउंसर ने उनकी पारी का अंत कर दिया।

भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही टी20 सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। 15 साल के इस युवा खिलाड़ी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा है, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भी वह अपनी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे।
202 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को वैभव से एक तेज शुरुआत की उम्मीद थी। उन्होंने आते ही अपने इरादे साफ कर दिए और कुछ शानदार शॉट लगाए, लेकिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की घातक रफ्तार के सामने उनकी पारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।
वैभव ने सिर्फ 5 गेंदों में 13 रन बनाए और लगातार दूसरे मैच में छोटी पारी खेलकर पवेलियन लौट गए।
आक्रामक शुरुआत के बाद आर्चर ने रोकी रफ्तार
भारतीय पारी की शुरुआत में वैभव सूर्यवंशी ने अपने अंदाज के मुताबिक तेजी से रन बनाने की कोशिश की। उन्होंने कुछ आकर्षक शॉट खेले और दो शानदार छक्के भी लगाए।
लेकिन तीसरे ओवर में जब इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर गेंदबाजी करने आए, तो मुकाबले का रुख बदल गया।
आर्चर ने अपनी तेज गति और उछाल का इस्तेमाल करते हुए वैभव के खिलाफ शॉर्ट पिच गेंद का सहारा लिया। लगभग 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आई बाउंसर पर वैभव ने हुक शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन अतिरिक्त गति के कारण वह गेंद को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर सके।
गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर जोस बटलर के हाथों में चली गई और वैभव की पारी का अंत हो गया।
दूसरे मैच में भी नहीं चला बल्ला
यह पहली बार नहीं था जब वैभव बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। इससे पहले सीरीज के दूसरे टी20 मुकाबले में भी वह जल्दी आउट हो गए थे।
दूसरे मैच में वैभव ने 10 गेंदों का सामना करते हुए 14 रन बनाए थे। हालांकि दोनों पारियों में उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की झलक दिखाई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ शुरुआत करना काफी नहीं होता। बड़े स्तर पर सफलता के लिए शुरुआत को बड़ी पारी में बदलना जरूरी होता है।
टीम मैनेजमेंट के सामने अब क्या विकल्प?
लगातार दो छोटी पारियों के बाद अब टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वैभव को आगे भी मौका दिया जाए या नहीं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने के लिए समय देना जरूरी होता है। शुरुआती असफलताएं किसी खिलाड़ी की क्षमता को तय नहीं करतीं। वैभव अभी सीखने के दौर में हैं और इंग्लैंड जैसे मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ खेलने का अनुभव उनके करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वहीं वैभव सूर्यवंशी के लिए आने वाले मुकाबले खुद को साबित करने का बड़ा मौका होंगे। टीम और फैंस दोनों उम्मीद करेंगे कि वह अपनी तेज शुरुआत को एक बड़ी और यादगार पारी में बदल सकें।
