यूरोप रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है, जहां भीषण गर्मी अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की जान ले चुकी है। WHO ने इस जानलेवा हीटवेव को 'साइलेंट किलर' बताया है और चेतावनी दी है कि हालात अभी और बिगड़ सकते हैं।

यूरोप इन दिनों इतिहास की सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई हीटवेव अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है और कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। फ्रांस, स्पेन, इटली, पोलैंड, चेक गणराज्य और लिथुआनिया जैसे देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।
भीषण गर्मी के कारण अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस हीटवेव को ‘साइलेंट किलर’ यानी ‘खामोश हत्यारा’ बताया है और चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
आखिर क्या है ‘साइलेंट किलर’?
WHO के अनुसार, अत्यधिक गर्मी यानी हीट स्ट्रेस (Heat Stress) को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी शोर-शराबे के लोगों की जान ले लेती है। तेज गर्मी के कारण शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ता है।
फ्रांस में सबसे ज्यादा तबाही
यूरोप में सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस की बताई जा रही है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 24 जून के बाद से महज कुछ दिनों में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई है।
इनमें से अधिकांश मृतक 65 वर्ष से अधिक आयु के थे। पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनके घरों में हो गई।
इसके अलावा, भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों और झीलों में उतरने के दौरान भी कई हादसे हुए, जिनमें दर्जनों लोगों की जान चली गई।
WHO ने क्यों जताई चिंता?
WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। उनके मुताबिक, महाद्वीप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 15 करोड़ लोग भीषण गर्मी की चपेट में हैं। कई देशों में स्कूल बंद करने पड़े हैं, बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और बिजली ग्रिड पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
AC और कूलिंग सिस्टम की बढ़ी मांग
गर्मी के कारण यूरोप के कई देशों में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग अचानक बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोरों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है और कई जगहों पर एयर कंडीशनर का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव के कारण ऊर्जा खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को तेज चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक पसीना, तेज बुखार या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।
जलवायु परिवर्तन बना बड़ी वजह
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बढ़ती वैश्विक गर्मी और जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी भीषण हीटवेव अब पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।
यूरोप की मौजूदा स्थिति पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान का सबसे बड़ा संकट बन चुका है।
