खान सर के हाथों में 5 किलो से ज्यादा राखियां! वहीं रोशन आनंद की कलाई पर भी सैकड़ों छात्राओं ने बांधी राखी. पटना में अनोखे अंदाज में मनाया गया रक्षाबंधन.

रक्षाबंधन का त्योहार देशभर में भाई-बहन के प्रेम और स्नेह के प्रतीक के तौर पर मनाया गया. पटना में इस बार कोचिंग संस्थानों में भी रक्षाबंधन को लेकर खास उत्साह देखने को मिला. चर्चित शिक्षक खान सर के संस्थान में बड़ी संख्या में छात्राओं ने उन्हें राखी बांधी.
वहीं, छात्रों के मुद्दों को लेकर हाल के दिनों में चर्चा में रहे रोशन आनंद ने भी अपने संस्थान में सैकड़ों छात्राओं के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया. कार्यक्रम में छात्राओं ने उन्हें राखी बांधी और मिठाई खिलाई. आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में राखियां जमा हो गईं.
खान सर के हाथों में दिखीं कई किलो राखियां
रक्षाबंधन के अवसर पर खान सर के संस्थान में छात्राओं की बड़ी संख्या पहुंची. छात्राओं ने उन्हें राखी बांधी और इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया. कार्यक्रम की तस्वीरों और वीडियो में खान सर के हाथों में बड़ी संख्या में राखियां दिखाई दीं. बताया गया कि उनके हाथों में करीब 5 किलो से ज्यादा राखियां थीं. खान सर के संस्थान में रक्षाबंधन का आयोजन हर साल चर्चा में रहता है. बड़ी संख्या में छात्राएं उन्हें राखी बांधने के लिए पहुंचती हैं. इस बार भी आयोजन को लेकर छात्राओं में काफी उत्साह दिखाई दिया.
रोशन आनंद की कलाई पर भी बंधीं सैकड़ों राखियां
इस बार रोशन आनंद ने भी अपने संस्थान में रक्षाबंधन का कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम में सैकड़ों छात्राओं ने हिस्सा लिया. छात्राओं ने रोशन आनंद को राखी बांधी और मिठाई खिलाई. बड़ी संख्या में राखियां बंधने के बाद उनकी कलाई पर राखियों का ढेर नजर आया. कार्यक्रम के दौरान संस्थान में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. छात्राओं के लिए भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गई थी.
छात्राओं के लिए 84 तरह के व्यंजनों की व्यवस्था
रोशन आनंद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं के लिए खास भोजन की व्यवस्था की गई. आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि करीब 84 प्रकार के व्यंजन तैयार कराए गए थे. रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं के लिए खाने-पीने से लेकर राखी और मिठाई तक की व्यवस्था की गई थी. कार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने भी उत्साह के साथ त्योहार मनाया. हालांकि 84 व्यंजनों का आंकड़ा आयोजकों की ओर से बताया गया है.
सरकार के फैसले के बाद रोशन आनंद ने जताई खुशी
रोशन आनंद ने रक्षाबंधन के मौके पर कहा कि इस बार उनके लिए यह त्योहार पहले से ज्यादा खुशी लेकर आया है. उन्होंने इसकी वजह छात्रों की कुछ मांगों को सरकार की ओर से स्वीकार किया जाना बताया. रोशन आनंद के मुताबिक छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति बनी है और कुछ समस्याओं का समाधान हुआ है. उनके लिए यह एक सकारात्मक बात है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से इस बार रक्षाबंधन का माहौल उनके लिए अलग और खास है.
पहले धरना स्थल पर मनाने की थी तैयारी
रोशन आनंद ने बताया कि उन्होंने पहले गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर छात्रों के साथ रक्षाबंधन मनाने की योजना बनाई थी. छात्रों की मांगों को लेकर वहां धरना चल रहा था और उन्होंने घोषणा की थी कि रक्षाबंधन भी उसी स्थान पर मनाया जाएगा. लेकिन सरकार के साथ सहमति बनने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया. इसके बाद रोशन आनंद ने अपने संस्थान में ही छात्राओं के साथ रक्षाबंधन मनाने का फैसला किया.
छात्राओं ने बांधी राखी और खिलाई मिठाई
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने रोशन आनंद की कलाई पर राखियां बांधीं. इसके बाद उन्हें मिठाई खिलाई गई. रक्षाबंधन का यह आयोजन सिर्फ राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भोजन और मिलन का भी कार्यक्रम रखा गया. बड़ी संख्या में छात्राओं की मौजूदगी के कारण संस्थान में काफी देर तक उत्सव का माहौल बना रहा.
खान सर और रोशन आनंद की तस्वीरें हुईं चर्चा में
पटना में रक्षाबंधन के मौके पर खान सर और रोशन आनंद के अलग-अलग आयोजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनीं. एक तरफ खान सर के हाथों में कई किलो राखियां नजर आईं, तो दूसरी तरफ रोशन आनंद की कलाई पर भी सैकड़ों राखियां बंधी दिखाई दीं. दोनों शिक्षकों के संस्थानों में छात्राओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने रक्षाबंधन के आयोजन को खास बना दिया.
छात्रों के बीच रक्षाबंधन का अलग महत्व
कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कई छात्र और छात्राएं अपने परिवार से दूर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे में त्योहारों के दौरान संस्थानों में आयोजित कार्यक्रम उन्हें एक साथ त्योहार मनाने का अवसर देते हैं. रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, लेकिन कई शिक्षण संस्थानों में शिक्षक और छात्र भी इस दिन स्नेह और सम्मान के भाव के साथ त्योहार मनाते हैं. पटना में इस बार हुए इन आयोजनों ने इसी परंपरा की एक अलग तस्वीर पेश की.
