
पेरिस, 28 मार्च।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकातें हुईं। इस दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की।
सर्जियो गोर ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए दी। उन्होंने लिखा कि फ्रांस में जी7 मंत्रीस्तरीय बैठक में शामिल होकर सहयोगियों और साझेदारों के साथ सार्थक चर्चा हुई।
ईरान को लेकर अमेरिकी बयान
बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत में कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा अमेरिकी सैन्य अभियान तय समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अभियान के लक्ष्य महीनों में नहीं बल्कि कुछ हफ्तों में पूरे हो सकते हैं।
ईरान की सैन्य क्षमता को निशाना
रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रणनीति तय की गई थी।
उन्होंने कहा,
“हम ईरान की नौसेना और वायुसेना को नष्ट करेंगे और उनकी मिसाइल तथा ड्रोन बनाने की क्षमता को फैक्ट्रियों में ही खत्म कर देंगे।”
उनके अनुसार इस अभियान का उद्देश्य ईरान के मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना है, ताकि वह इनके जरिए परमाणु हथियार विकसित कर दुनिया को धमकाने की स्थिति में न रहे।
बिना जमीनी सैनिकों के ऑपरेशन
रुबियो ने स्पष्ट किया कि इस सैन्य अभियान में जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी और लक्ष्य ग्राउंड टूप्स के बिना ही हासिल किए जा सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चेतावनी
अमेरिकी विदेश मंत्री ने ऑपरेशन के बाद संभावित जोखिमों का जिक्र करते हुए होर्मुज स्ट्रेट का उल्लेख किया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम समुद्री मार्ग है।
उन्होंने कहा कि ईरान वहां टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे उन्होंने अवैध, अस्वीकार्य और दुनिया के लिए खतरनाक बताया।
