🚨 स्कूल के बाहर जंक फूड पर लग सकती है रोक! FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक स्कूल के 50 मीटर के दायरे में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा नमक-चीनी वाले फूड की बिक्री पर रोक लग सकती है. जानें पूरा मामला.....

बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के लिए FSSAI बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. प्रस्ताव के मुताबिक स्कूल कैंपस और उसके 50 मीटर के दायरे में HFSS यानी ज्यादा फैट, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लग सकती है…..
अगर आपका बच्चा स्कूल से घर लौटते वक्त रास्ते में चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक या कोई दूसरा जंक फूड खरीदने की जिद करता है, तो आने वाले समय में तस्वीर बदल सकती है. बच्चों को कम उम्र से ही अनहेल्दी खाने की आदत से दूर रखने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित नियम के तहत स्कूल कैंपस के अलावा उसके आसपास के 50 मीटर के दायरे में भी HFSS फूड की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है. यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है—अभी यह अंतिम नियम नहीं है, बल्कि प्रस्ताव के स्तर पर है…….
क्या है FSSAI का प्रस्ताव….?
FSSAI स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाने को लेकर नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है. प्रस्ताव का मकसद बच्चों की पहुंच उन खाद्य पदार्थों तक कम करना है, जिनमें फैट, चीनी या नमक की मात्रा ज्यादा होती है. इसके तहत स्कूल परिसर और उसके आसपास के 50 मीटर क्षेत्र में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है. सरल शब्दों में कहें तो अगर यह प्रस्ताव मंजूर होकर लागू होता है, तो स्कूल के गेट के बाहर मौजूद दुकानों और दूसरे बिक्री केंद्रों पर भी कुछ खास जंक फूड आसानी से उपलब्ध नहीं होंगे.
किन चीजों पर लग सकती है रोक….?
प्रस्तावित नियम में HFSS (High Fat, Sugar and Salt) यानी ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों को लेकर चिंता जताई गई है.
इनमें मुख्य रूप से शामिल हो सकते हैं:
- चिप्स और इसी तरह के पैकेज्ड स्नैक्स
- ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ
- कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे पेय
- ज्यादा नमक या फैट वाले खाद्य पदार्थ
- दूसरे HFSS फूड
किसी खास ब्रांड या हर पैकेज्ड फूड पर रोक लगेगी, यह अंतिम नियम और उसकी परिभाषाओं पर निर्भर करेगा.
सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है प्रस्ताव…..
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 50 मीटर वाला नियम अभी लागू नहीं हुआ है. FSSAI की ओर से इससे संबंधित ड्राफ्ट रेगुलेशन तैयार किया गया है और प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है. अब इस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और इसे लागू किया जाता है, तभी स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री को लेकर यह नया नियम प्रभावी होगा. इसलिए फिलहाल इसे ‘लागू हो चुका नियम’ मानना सही नहीं होगा……
बच्चों के लिए क्यों जरूरी माना जा रहा है…..?
आजकल बच्चों की खाने की पसंद तेजी से बदल रही है. घर के खाने के बजाय कई बच्चे चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और दूसरे जंक फूड को ज्यादा पसंद करते हैं. स्कूल के बाहर ऐसी चीजें आसानी से उपलब्ध होने के कारण बच्चों के लिए इन्हें खरीदना भी आसान होता है. प्रस्ताव का उद्देश्य इसी आसान उपलब्धता को कम करना है. अगर स्कूल के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थ कम उपलब्ध होंगे, तो बच्चों के लिए फल, घर का बना खाना और दूसरे पौष्टिक विकल्प चुनने की संभावना बढ़ सकती है.
क्या बच्चों की जंक फूड की आदत कम होगी…..?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका एक संभावित फायदा यह हो सकता है कि बच्चों की जंक फूड तक तत्काल पहुंच कम हो जाए. स्कूल से निकलते ही चिप्स या कोल्ड ड्रिंक खरीदने का विकल्प नहीं मिलने पर बच्चे दूसरे स्नैक्स की ओर जा सकते हैं. इससे कम उम्र में खाने की आदतों को बेहतर दिशा देने में मदद मिल सकती है. सिर्फ बिक्री पर रोक लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा. बच्चों को हेल्दी फूड के फायदे समझाना और स्कूल व घर में पौष्टिक खाने को बढ़ावा देना भी उतना ही जरूरी रहेगा.
माता-पिता के लिए भी बड़ा बदलाव…..
अगर नियम लागू होता है तो इसका असर सिर्फ दुकानदारों पर नहीं, बल्कि माता-पिता और बच्चों की रोजमर्रा की आदतों पर भी पड़ सकता है. स्कूल के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम होने से अभिभावकों को बच्चों के लिए हेल्दी स्नैक्स चुनने का बेहतर मौका मिलेगा. स्कूल भी कैंटीन और आसपास के खाद्य विकल्पों को लेकर ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं…..
