दलीप ट्रॉफी फाइनल में 270 रन ठोककर ईशान ने यशस्वी जायसवाल के 265 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईशान किशन ने बल्ले से ऐसा तूफान मचाया कि रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा लिया। ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान ने साउथ जोन के खिलाफ पहली पारी में 270 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी के साथ ही दलीप ट्रॉफी में यशस्वी जायसवाल के सबसे बड़े स्कोर का रिकॉर्ड भी टूट गया।
ईशान ने अपनी मैराथन पारी के दौरान 334 गेंदों का सामना किया और 30 चौके व 7 छक्के लगाए। इस दौरान उन्होंने अकेले ही ईस्ट जोन के स्कोर को मजबूत आधार दिया। उनकी पारी की खास बात यह रही कि उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर रन बनाए और टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
यशस्वी जायसवाल का रिकॉर्ड हुआ पीछे
ईशान किशन की 270 रनों की पारी ने दलीप ट्रॉफी में भारतीय बल्लेबाजों के बीच एक बड़ा रिकॉर्ड बदल दिया है। इससे पहले यशस्वी जायसवाल ने 2022 में दलीप ट्रॉफी में 265 रन की शानदार पारी खेली थी। यह उस समय टूर्नामेंट में उनका सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था। अब ईशान ने 270 रन बनाकर जायसवाल को पीछे छोड़ दिया है।
हालांकि, ईशान किशन एक और बड़े रिकॉर्ड से महज कुछ रन दूर रह गए। दलीप ट्रॉफी में वीरेंद्र सहवाग के 274 रन के स्कोर को पीछे छोड़ने के लिए उन्हें सिर्फ 5 रन और चाहिए थे। यानी ईशान 270 रन पर आउट होकर एक बड़े रिकॉर्ड से चूक गए, लेकिन उन्होंने टूर्नामेंट के इतिहास में अपना नाम जरूर दर्ज करा लिया।
270 रन की पारी के बाद ईशान किशन दलीप ट्रॉफी में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं। इस सूची में सबसे ऊपर दिवंगत भारतीय बल्लेबाज रमन लांबा हैं, जिन्होंने 1987 में 320 रनों की शानदार पारी खेली थी। उनके बाद गगन खोड़ा का नंबर आता है, जिन्होंने 2001 में नाबाद 300 रन बनाए थे।
दलीप ट्रॉफी में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर
- 320 रन – रमन लांबा, 1987
- 300 रन* – गगन खोड़ा, 2001
- 292 रन – सुरेंद्र भावे, 1994
- 287 रन – अरुण लाल, 1986
- 278 रन – संजय मांजरेकर, 1987
- 275 रन – लालचंद राजपूत, 1987
- 274 रन – वीरेंद्र सहवाग, 1999
- 270 रन – ईशान किशन, 2026
- 265 रन – यशस्वी जायसवाल, 2022
इस सूची को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ईशान की 270 रनों की पारी कितनी खास है। उन्होंने दलीप ट्रॉफी के कई दिग्गज बल्लेबाजों के बीच अपनी जगह बना ली है।
ईस्ट जोन ने खड़ा किया 708 रन का पहाड़
फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और इसका पूरा फायदा उठाया। टीम ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। ईशान किशन की 270 रनों की पारी इस स्कोर की सबसे बड़ी वजह रही। उनके अलावा कुमार कुशाग्र ने 101 रन की शानदार शतकीय पारी खेली। उन्होंने 132 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौके और 5 छक्के लगाए।
वहीं नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आए शिखर मोहन ने 85 रन बनाए, जबकि सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रनों का योगदान दिया। ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने साउथ जोन के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और टीम को 700 से ज्यादा के स्कोर तक पहुंचा दिया।
सिराज की गेंदबाजी रही महंगी
साउथ जोन की ओर से स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी ईस्ट जोन के बल्लेबाजों पर ज्यादा प्रभाव नहीं डाल सके। उन्होंने 25 ओवर की गेंदबाजी में 140 रन खर्च किए, जबकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला।
साउथ जोन के लिए त्रिपुरण विजय सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 4 विकेट अपने नाम किए। चामा वी मिलिंद और श्रेयस गोपाल को 2-2 विकेट मिले, जबकि शेख रसीद को एक सफलता मिली।
ईशान के लिए क्यों खास है यह पारी?
ईशान किशन की 270 रनों की पारी सिर्फ एक बड़ा स्कोर नहीं है। यह पारी ऐसे समय आई है जब घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर चयनकर्ताओं की नजर रहती है। लंबी पारी खेलने की क्षमता, आक्रामक बल्लेबाजी और दबाव में टीम को संभालना—ईशान ने इस पारी में इन तीनों खूबियों की झलक दिखाई। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कप्तानी की जिम्मेदारी संभालते हुए यह पारी खेली। ऐसे में 270 रन का यह स्कोर उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ टीम के लिए भी बेहद अहम साबित हुआ।
ईशान किशन ने 270 रन बनाकर यशस्वी जायसवाल का 265 रन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालांकि वह वीरेंद्र सहवाग के 274 रन से सिर्फ 4 रन पीछे रह गए। लेकिन रिकॉर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण अब यह होगा कि ईस्ट जोन अपने 708 रन के विशाल स्कोर का किस तरह बचाव करता है और फाइनल का नतीजा क्या रहता है।
