😳 नौकरी में घंटों एक्स्ट्रा काम, लेकिन पैसे नहीं! ADP की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 24% कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना भुगतान के काम करते हैं। Unpaid Work के मामले में भारत 36 देशों की लिस्ट में सबसे आगे है। आखिर क्यों बढ़ रहा है बिना वेतन वाला काम?

ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी काम करना या ब्रेक के दौरान काम निपटाना अब आम होता जा रहा है. ADP की People at Work 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 24 फीसदी कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के काम करते हैं. जानिए रिपोर्ट में और क्या सामने आया……
नौकरी में तय समय से ज्यादा काम करना कोई नई बात नहीं है. लेकिन अगर इस अतिरिक्त काम के बदले कर्मचारी को कोई भुगतान न मिले, तो यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली जरूर है. भारत में Unpaid Work को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने इसी ओर ध्यान खींचा है. ADP की People at Work 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल भारतीय कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा हर सप्ताह अपनी तय ड्यूटी के घंटों से ज्यादा काम करता है और इसके लिए उसे अलग से भुगतान नहीं मिलता……
भारत में 24 फीसदी कर्मचारी करते हैं 16 घंटे से ज्यादा Unpaid Work……
ADP ने साल 2025 में 36 देशों के 39 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को अपने सर्वे में शामिल किया था. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 24 फीसदी कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना भुगतान के अतिरिक्त काम करते हैं. यह आंकड़ा सर्वे में शामिल देशों में सबसे ज्यादा है. सिर्फ इतना ही नहीं, भारत में करीब 40 फीसदी कर्मचारी हर सप्ताह 6 से 15 घंटे तक बिना भुगतान के काम करने की बात कहते हैं. इसका मतलब है कि सर्वे में शामिल भारतीय कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा हर सप्ताह अपनी तय ड्यूटी से अतिरिक्त समय काम कर रहा है.
आखिर Unpaid Work में क्या शामिल है……?
Unpaid Work का मतलब सिर्फ ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना नहीं है. इसमें कई ऐसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं, जिन्हें कर्मचारी अपने नियमित काम के समय के बाहर पूरा करता है. ADP के अनुसार इसमें लंच ब्रेक के दौरान काम करना या ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी काम करते रहना जैसी स्थितियां शामिल हैं. यानी कर्मचारी ऑफिस से निकलने के बाद भी ईमेल, रिपोर्ट, कॉल या दूसरे जरूरी कामों में समय लगाता है, लेकिन उसके लिए उसे अलग से मेहनताना नहीं मिलता……
भारत के बाद इन देशों का नंबर……
16 घंटे या उससे ज्यादा बिना भुगतान के काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भारत के बाद तुर्की 23 फीसदी के साथ दूसरे और ऑस्ट्रिया 21 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है. वहीं अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 20 फीसदी रहा. दूसरी ओर चेक रिपब्लिक में केवल 4 फीसदी कर्मचारियों ने 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना भुगतान के अतिरिक्त काम करने की बात कही. चीन, ताइवान और जापान में यह आंकड़ा करीब 6 फीसदी रहा……
दुनिया में क्या है स्थिति……?
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर स्थिति भारत की तुलना में अलग है. दुनियाभर में करीब 62 फीसदी कर्मचारी हर सप्ताह 5 घंटे या उससे कम बिना भुगतान वाला अतिरिक्त काम करते हैं. वहीं 26 फीसदी कर्मचारी 6 से 15 घंटे और करीब 12 फीसदी कर्मचारी 16 घंटे या उससे ज्यादा बिना वेतन के काम करते हैं. इस तुलना में भारत का 24 फीसदी आंकड़ा काफी ज्यादा है.
क्यों बढ़ रहा है बिना भुगतान वाला काम…….?
काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट ने ऑफिस के काम को कहीं से भी करना आसान बना दिया है. इसका फायदा जरूर है, लेकिन कई बार यही सुविधा काम और निजी समय के बीच की सीमा को भी खत्म कर देती है. ऑफिस का समय खत्म होने के बाद ईमेल चेक करना, घर से रिपोर्ट पूरी करना या छुट्टी के दौरान जरूरी काम निपटाना धीरे-धीरे कर्मचारियों की दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है. यही वजह है कि Work-Life Balance को लेकर दुनियाभर में चर्चा बढ़ रही है.
क्या ज्यादा काम करना हमेशा ज्यादा कमाई देता है……?
कई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए तय समय से ज्यादा काम करते हैं, लेकिन हर अतिरिक्त घंटे के लिए उन्हें अलग भुगतान नहीं मिलता. ऐसे में काम के घंटे बढ़ने के बावजूद आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होती. इसका असर कर्मचारी के आराम, निजी जीवन और मानसिक थकान पर भी पड़ सकता है.
भारत के लिए क्या संकेत देती है रिपोर्ट…….?
ADP की यह रिपोर्ट भारत में काम करने के तरीकों और कर्मचारियों के Work-Life Balance पर सवाल खड़े करती है. अगर बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमित रूप से बिना भुगतान के अतिरिक्त घंटे काम कर रहे हैं, तो कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए यह समझना जरूरी है कि उत्पादकता और अतिरिक्त काम के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. आखिर काम जरूरी है, लेकिन हर अतिरिक्त घंटे की अपनी कीमत होती है.……
