हिमाचल के कुल्लू जिले के निरमंड में बागीपुल-जाओं मार्ग पर अचानक भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा और करीब 200 मीटर सड़क मलबे में दब गई।

दोस्तों, कल्पना कीजिए… धूप खिली हुई है, आसमान साफ है, दूर-दूर तक बारिश का नामोनिशान नहीं है। आप पहाड़ी रास्तों पर सुकून से सफर कर रहे हैं और अचानक… आपकी आँखों के सामने एक पूरा का पूरा पहाड़ ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है! सुनने में यह किसी हॉलीवुड की डिजास्टर फिल्म का सीन लगता है ना? लेकिन सोमवार, 31 अगस्त 2026 की सुबह, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में यह खौफनाक मंजर हकीकत में बदला।
जगह थी कुल्लू का निरमंड उपमंडल, जहाँ सुबह के करीब 10 बजे रोजाना की तरह चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। बागीपुल-जाओं मुख्य मार्ग पर गाड़ियां आ-जा रही थीं। तभी अचानक हवा में एक अजीब सी गड़गड़ाहट गूंजती है। लोग संभल पाते, इससे पहले ही बागीपुल के पास की विशाल पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा दरकने लगता है।
देखते ही देखते, लाखों टन मलबा, भारी-भरकम चट्टानें और मिट्टी का एक सैलाब ऊपर से नीचे की तरफ दौड़ पड़ता है। जो सड़क कुछ सेकंड पहले तक दो इलाकों को जोड़ रही थी, उसका करीब 200 मीटर हिस्सा मलबे के इस खौफनाक बवंडर में समाकर पूरी तरह गायब हो गया। खुशकिस्मती कहिए या कुदरत का करिश्मा, जैसे ही पहाड़ हिला, वहां मौजूद लोगों ने खतरे को भांप लिया और तुरंत पीछे हट गए, जिसकी वजह से इस बेहद खतरनाक हादसे में किसी की भी जान नहीं गई।
इस लैंडस्लाइड ने वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों, दोनों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर माना जाता है कि भारी बारिश के बाद ही पहाड़ खिसकते हैं, लेकिन यहाँ मौसम बिल्कुल साफ था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे ड्राई लैंडस्लाइड या सूखा भूस्खलन कहते हैं। पिछले दिनों हुई मानसूनी बारिश का पानी पहाड़ों के अंदरूनी हिस्सों में रिसकर जमा हो गया था, जिससे अंदर की मिट्टी पूरी तरह दलदल बन चुकी थी। ऊपर से भले ही पहाड़ सूखा दिख रहा था, लेकिन अंदरूनी अस्थिरता के कारण वह अपना ही वजन नहीं संभाल पाया।मौके पर क्या है हालात? इस अचानक आई आपदा के बाद बागीपुल-जाओं मार्ग के दोनों तरफ गाड़ियों का लंबा जाम लग गया है। कई लोग बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। हालांकि, घटना की जानकारी मिलते ही कुल्लू प्रशासन और लोक निर्माण विभाग यानी PWD की टीमें भारी मशीनों और जेसीबी के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गईं। युद्ध स्तर पर मलबे को हटाने और रास्ते को दोबारा तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति कितनी अनिश्चित है। अगर आप भी इन दिनों हिमाचल या किसी अन्य पहाड़ी राज्य की वादियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! सिर्फ बारिश का मौसम देखकर ही सतर्क न रहें, बल्कि साफ मौसम में भी इन कच्चे पहाड़ों पर सफर करते समय अपनी आँखें और कान खुले रखें। सफर पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन की ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर चेक करें। सुरक्षित रहें और कुदरत के इस रौद्र रूप से सबक लें!
