सनी देओल का मुस्लिम किरदार बना चर्चा की वजह! 🎬 शबाना आजमी की बात पर डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिया करारा जवाब। जानिए क्या है पूरा विवाद?

सनी देओल स्टारर फिल्म ‘बंटवारा 1947’ रिलीज के बाद से ही चर्चा में है. फिल्म को लेकर अब कहानी और बॉक्स ऑफिस से ज्यादा उसके मुख्य किरदार को लेकर बहस छिड़ गई है. फिल्म में सनी देओल ने सिकंदर मिर्जा नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति का किरदार निभाया है. फिल्म की कमजोर बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस पर अभिनेत्री शबाना आजमी ने अपनी राय रखी थी. उनका मानना था कि संभव है दर्शक सनी देओल की एक्शन और देशभक्ति वाली स्थापित छवि की वजह से उन्हें मुस्लिम किरदार में आसानी से स्वीकार नहीं कर पाए.
शबाना आजमी ने क्या कहा….?
शबाना आजमी ने फिल्म के प्रदर्शन पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें लोगों से फिल्म के लिए अच्छी प्रतिक्रिया सुनने को मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद दर्शक बड़ी संख्या में सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचे. उन्होंने सवाल उठाया कि दर्शक सनी देओल को मुस्लिम किरदार में स्वीकार क्यों नहीं कर पाए. शबाना ने इसकी तुलना अमिताभ बच्चन के उन किरदारों से की, जिनमें उन्होंने मुस्लिम पात्र निभाए थे. शबाना के मुताबिक, सनी देओल की लोकप्रिय छवि शायद इस किरदार के साथ दर्शकों के लिए आसानी से मेल नहीं बैठा पाई. उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म का संदेश इंसानियत और नफरत से ऊपर उठने की बात करता है, इसलिए इसकी प्रतिक्रिया को लेकर वह हैरान हैं.
राजकुमार संतोषी ने थ्योरी को किया खारिज….
शबाना आजमी की इस राय पर अब फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी ने प्रतिक्रिया दी है. संतोषी ने इस बात से असहमति जताई कि सनी देओल का मुस्लिम किरदार फिल्म की असफलता की वजह हो सकता है. उन्होंने कहा कि किसी अभिनेता को किसी खास समुदाय के किरदार में देखना दर्शकों के लिए इतना मुश्किल होना उन्हें समझ नहीं आता. संतोषी ने उदाहरण देते हुए अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘कुली’ का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मुस्लिम किरदार निभाया था. निर्देशक के मुताबिक, अभिनेता की पिछली छवि और उसके नए किरदार के बीच अंतर होना अपने आप में किसी फिल्म की असफलता का कारण नहीं माना जा सकता.
सनी देओल ने निभाया है सिकंदर मिर्जा का किरदार….
‘बंटवारा 1947’ में सनी देओल सिकंदर मिर्जा की भूमिका में हैं. कहानी भारत के विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है. उनका किरदार एक भारतीय मुस्लिम व्यक्ति का है, जिसकी जिंदगी विभाजन के बाद बदल जाती है. फिल्म में शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं. फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है और इसे आमिर खान ने प्रोड्यूस किया है.
क्या सिर्फ किरदार की वजह से फिल्म नहीं चली….?
फिल्म के कमजोर प्रदर्शन को लेकर सिर्फ एक वजह तय करना मुश्किल है. शबाना आजमी ने जहां सनी देओल के मुस्लिम किरदार को एक संभावित वजह माना, वहीं फिल्म को लेकर आलोचकों की राय भी मिली-जुली रही है. रिलीज के समय फिल्म की कहानी, ट्रीटमेंट और दर्शकों की प्रतिक्रिया को लेकर अलग-अलग राय सामने आई. ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के प्रदर्शन को केवल सनी देओल के किरदार से जोड़ना एक बहस का विषय बना हुआ है. इससे पहले भी राजकुमार संतोषी बता चुके हैं कि फिल्म में सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर कुछ निवेशकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के मन में शुरुआती झिझक थी. उनका कहना था कि सनी की पारंपरिक एक्शन-हीरो वाली छवि और फिल्म के विषय को देखते हुए कुछ लोगों को प्रोजेक्ट जोखिम भरा लगा था.
बॉलीवुड में फिर उठा ‘टाइपकास्टिंग’ का सवाल….
सनी देओल के किरदार को लेकर शुरू हुई यह बहस हिंदी सिनेमा में कलाकारों की स्थापित छवि और टाइपकास्टिंग के सवाल को भी सामने लाती है. दर्शक किसी अभिनेता को लंबे समय तक जिस तरह के किरदारों में देखते हैं, उसके बाद उस कलाकार को बिल्कुल अलग भूमिका में स्वीकार करने में कितना समय लगता है—यह सवाल अब ‘बंटवारा 1947’ के बहाने फिर चर्चा में है. फिलहाल शबाना आजमी और राजकुमार संतोषी की राय अलग-अलग है. एक तरफ शबाना इसे दर्शकों की स्वीकार्यता से जोड़ रही हैं, वहीं संतोषी का मानना है कि किसी अभिनेता की पहचान को उसके किरदार की सीमा नहीं बनाया जाना चाहिए…..
