महेश भट्ट से मिलने के लिए मुश्ताक खान को करना पड़ा था लंबा इंतजार, यहां तक कि हर फोन मैसेज के लिए किराने वाले को देते थे 1 रुपया। सलीम खान की मदद से बदली किस्मत और मिला फिल्मों में काम।

1 रुपये देकर फोन का इंतजार करते थे एक्टर, फिर ऐसे मिला महेश भट्ट की फिल्म में काम….
बॉलीवुड में पहचान बनाना आसान नहीं होता। कई कलाकारों को अपने करियर के शुरुआती दौर में लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ता है। अभिनेता मुश्ताक खान ने भी अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए फिल्ममेकर महेश भट्ट के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि उस दौर में महेश भट्ट से कुछ मिनटों के लिए मिलना भी उनके लिए बेहद मुश्किल हुआ करता था।
महेश भट्ट से मिलना था बेहद मुश्किल….
मुश्ताक खान ने सविता असीम के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान बताया कि 1980 के दशक में उनके लिए महेश भट्ट से मिलना आसान नहीं था। उस समय वह इंडस्ट्री में नए थे और उनके पास अपना फोन तक नहीं था। इसके अलावा महेश भट्ट ज्यादा अंग्रेजी में बात करते थे, जबकि मुश्ताक गांव से आए हुए थे। एक्टर के मुताबिक, वह लगातार इस कोशिश में रहते थे कि किसी तरह महेश भट्ट से मुलाकात हो जाए और उन्हें काम का मौका मिल सके।
सलीम खान ने बढ़ाया मदद का हाथ….
मुश्ताक खान की किस्मत तब बदली जब उनकी मुलाकात मशहूर स्क्रीनराइटर सलीम खान के जरिए महेश भट्ट से हुई। सलीम खान ने उन्हें फिल्म ‘नाम’ में एक रोल के लिए रिकमेंड किया था। इसके बाद उन्होंने मुश्ताक को उस स्टूडियो में जाने को कहा, जहां महेश भट्ट शूटिंग कर रहे थे। मुश्ताक ने बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटाई और आखिरकार महेश भट्ट से मुलाकात की। इसके बाद महेश भट्ट ने उन्हें अपने भाइयों मुकेश भट्ट और रॉबिन भट्ट से मिलने की सलाह दी।
हर मैसेज के लिए किराने वाले को देते थे 1 रुपया….
मुश्ताक खान के संघर्ष की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि उस समय उनके घर पर फोन नहीं था। इसलिए उन्होंने पास की एक किराने की दुकान को अपना संपर्क केंद्र बना लिया था। वह किराने वाले को हर मैसेज के लिए 1 रुपया देते थे और कहते थे कि अगर उनके लिए कोई फोन आए तो उन्हें जानकारी दी जाए। एक्टर रोज शाम को किराने की दुकान पर पहुंचकर पूछते थे कि उनके लिए कोई फोन आया या नहीं। करीब 15 दिन बाद किराने वाले ने उन्हें बताया कि महेश भट्ट का फोन आया था। इसके बाद मुश्ताक खान को आखिरकार महेश भट्ट की फिल्म में काम करने का मौका मिल गया।
‘कब्जा’ से शुरू हुआ नया सफर….
साल 1988 में रिलीज हुई महेश भट्ट की फिल्म ‘कब्जा’ में मुश्ताक खान को काम मिला। फिल्म में उनके एक सीन को महेश भट्ट ने पसंद किया। इसके बाद उन्होंने मुश्ताक को अपनी टेलीफिल्म ‘स्वयं’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी। धीरे-धीरे मुश्ताक खान और महेश भट्ट का प्रोफेशनल रिश्ता मजबूत होता गया और दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया।
इन फिल्मों में भी साथ नजर आए….
मुश्ताक खान ने महेश भट्ट के साथ ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘जुनून’, ‘हम हैं राही प्यार के’ और ‘चाहत’ जैसी फिल्मों में काम किया। मुश्ताक खान का यह किस्सा बताता है कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और सही लोगों की मदद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिस कलाकार के लिए कभी एक मुलाकात मुश्किल थी, उसी ने आगे चलकर महेश भट्ट की कई चर्चित फिल्मों में अपनी पहचान बनाई।
