Boycott आज का ट्रेंड नहीं, 120 साल पुराना हथियार है! जानिए कैसे स्वदेशी आंदोलन ने अंग्रेजी सामान के बहिष्कार को आजादी की लड़ाई का हथियार बना दिया।

क्या आपको लगता है कि बॉयकाट करना आज का ट्रेंड है?
So ur wrong,
India में Boycott की history 120 साल पुरानी है।
हमारे फ्रीडम फाइटर्स ने आज़ादी से पहले ही बॉयकाट को एक सुपर-वेपन बना दिया था
कहानी शुरू हुई 1905 में। जब ब्रिटिश गवर्नर लॉर्ड कर्जन ने बंगाल को डिवाइड किया, तो इंडियंस का पारा चढ़ गया। कलकत्ता टाउन हॉल में मीटिंग हुई और जन्म हुआ Swadeshi Movement का।
लिटरली, मैनचेस्टर का कपड़ा और लिवरपूल का नमक सड़कों पर जलाया जाने लगा। ब्रिटिश गुड्स को पूरी तरह Thank you, next बोल दिया गया और इंडियन बिज़नेसेस को प्रमोट किया गया।
फिर आए महात्मा गांधी, जिन्होंने नॉन-कॉपरेशन मूवमेंट में बॉयकाट को प्रो-मैक्स लेवल पर पहुंचा दिया। अब सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि ब्रिटिश स्कूल, कॉलेज, कोर्ट्स और सरकारी नौकरियां भी बॉयकाट होने लगीं
विदेशी कपड़ों को छोड़कर लोगों ने खादी अपनाई। चरखा सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि ब्रिटिश इकॉनमी की रीढ़ तोड़ने का सबसे बड़ा सिंबल बन गया।
यानी हमारी आज़ादी की नींव में ही बॉयकाट का एक बहुत बड़ा हाथ था। इस हिस्ट्री के बारे में आपका क्या सोचना है? कमेंट्स में जरूर बताएं
