ताजमहल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल को तेजोमहालय बताए जाने वाले दावे पर केंद्र सरकार और ASI से जवाब मांगा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ताजमहल को लेकर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा का ताजमहल लंबे समय से इतिहास, संस्कृति और धार्मिक दावों को लेकर विवादों के केंद्र में रहा है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब मांगे जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह विवाद सियासी रूप से भी महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। हालांकि इस मामले पर अंतिम निर्णय न्यायालय के स्तर पर होना है, लेकिन राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाओं ने बहस को और तेज कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरात्तव विभाग को नोटिस जारी कर ताजमहल के तेजोमहालय होने वाले दावे पर जवाब मांगा है. जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर मामला गर्माते हुए दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर सत्ता और विरोधी पक्ष आमने सामने दिखाई दे सकते हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि इससे खुद को हिन्दूवादी पार्टी बताने वाली भारतीय जनता पार्टी को फायदा हो सकता है.
मुस्लिम जहां इसे मकबरा मानते हैं तो वहीं कुछ हिंदू संगठन और कुछ लेखक लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि ताजमहल मूल रूप से भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था, जिसे “तेजोमहालय” कहा जाता था। इन दावों को लेकर वर्षों से बहस और कानूनी याचिकाएं दायर होती रही हैं।
विशेषज्ञों की अलग-अलग राय
इस मामले पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पॉलिटिकल हेड डॉ. आरिफ का कहना है कि देश की सभी प्राचीन विरासत का अपना-अपना महत्व है और वह भारत की विराट व अद्भुत परंपरा को ही दर्शाते हैं. इनमें से एक ताजमहल भी है. वह भी सरकारी संस्थान की देखरेख में सकुशल संरक्षित हैं. वैसे वर्तमान समय भारत के साथ-साथ दुनिया के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिकता, तकनीक की संभावनाओं पर ज्यादा आधारित है. यह बातें हमारे छात्रों युवाओं और मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को भी प्रभावित करती है. इसलिए, अब किसी भी विरासत अथवा स्थल का नाम कुछ और होने से ज्यादा प्रभावशाली आम जन को अपने मूल भूत विषय प्रभावित करने वाले साबित हो सकते हैं.
2027 चुनाव में क्या बन सकता है मुद्दा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक विषय पहले भी चुनावी बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में ताजमहल-तेजोमहालय विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ लेखक और पत्रकार डॉ. भानुप्रताप सिंह का मानना है कि ‘ताजमहल में बहुत सारे ऐसे चिन्ह हैं जो ये प्रदर्शित करते हैं कि इसमें कहीं न कहीं हिन्दू वास्तुकला का प्रभाव रहा है. इसमें डमरू है. मछली हैं, राम का नाम भी लिखा हुआ हैं. इन सब बातों को देखते हुए और जो बहुत सारी किवदंतियां हैं कथाएं हैं इस कारण से उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि ये ताजमहल है या तेजोमहालय.’
उन्होंने कहा कि जाहिर है चुनाव में इसका फायदा हिन्दू वादी पार्टी के रुप में प्रसिद्ध भारतीय जनता पार्टी को मिलने वाले हैं. दूसरा पक्ष भी इसका फायदा लेने का प्रयास करेगा. ताजमहल की बात आती है तो ये मामला हिन्दू-मुसलमान का हो जाता है ऐसे में ये एक बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है. बता दें कि ये मामला अभी कोर्ट में चल रहा है लेकिन इस पर राजनीति होना तय है. इससे पहले बाबरी विध्वंस मामले पर भी इसी तरह की राजनीति देखने को मिल चुकी है.
हालांकि चुनाव अभी दूर हैं और मतदाताओं के सामने विकास, रोजगार, कानून व्यवस्था, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी मौजूद हैं। इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विषय न्यायालय की सीमाओं तक रहता है या फिर चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बनता है।
