भारतीय सेना को मिला नया नेतृत्व। जनरल धीरज सेठ बने 31वें आर्मी चीफ। जानिए उनके चार दशक लंबे सैन्य सफर, अहम जिम्मेदारियों, सैन्य सम्मान और सेना के भविष्य को लेकर उनकी बड़ी योजनाओं के बारे में।

भारतीय सेना को नया नेतृत्व मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार, 30 जून 2026 को भारतीय सेना के 31वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है।
आर्मर्ड कॉर्प्स से आने वाले जनरल धीरज सेठ का सेना प्रमुख बनना भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के सैन्य अनुभव, रणनीतिक नेतृत्व और आधुनिक युद्ध प्रणाली की गहरी समझ के साथ वह ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में सेना के आधुनिकीकरण, तकनीकी बदलाव और संयुक्त सैन्य संचालन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
31वें सेना प्रमुख बने जनरल धीरज सेठ
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बने हैं। इससे पहले वह वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और साउथ वेस्टर्न कमांड की कमान भी संभाली है।
1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के बाद वह आर्मर्ड कॉर्प्स से सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी हैं। इसे उनके सैन्य करियर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
1986 में सेना में हुए थे शामिल
जनरल धीरज सेठ को वर्ष 1986 में प्रतिष्ठित 2nd Lancers (गार्डनर हॉर्स) रेजिमेंट में कमीशन मिला था। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने भारतीय सेना की कई महत्वपूर्ण इकाइयों और कमांड का नेतृत्व किया।
उन्होंने—
- सदर्न कमांड (पुणे)
- साउथ वेस्टर्न कमांड (जयपुर)
- XXI कॉर्प्स (भोपाल)
- जम्मू-कश्मीर में काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स
- आर्मर्ड ब्रिगेड
- आर्मर्ड रेजिमेंट
जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। पाकिस्तान सीमा से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों में उनकी कमान को काफी अहम माना जाता है।
रणनीतिक योजना और सेना के आधुनिकीकरण में अहम भूमिका
मैदानी जिम्मेदारियों के अलावा जनरल धीरज सेठ ने सेना की रणनीतिक योजना, भविष्य की युद्ध नीति और आधुनिक सैन्य तकनीकों को अपनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और आधुनिक हथियार प्रणालियों के उपयोग पर अधिक ध्यान दे सकती है।
नए सेना प्रमुख के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना प्रमुख बने हैं, जब भारतीय सेना खुद को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रही है। उनका कार्यकाल कई अहम सैन्य सुधारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनके सामने प्रमुख चुनौतियां होंगी—
- इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) को पूरी तरह लागू करना।
- सेना में ड्रोन और अत्याधुनिक तकनीकों का विस्तार।
- सेना के आधुनिकीकरण की गति तेज करना।
- इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड की दिशा में प्रगति।
- तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को नई दिशा देने में उनकी भूमिका अहम होगी।
शानदार शैक्षणिक और सैन्य पृष्ठभूमि
जनरल धीरज सेठ ने कई प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनमें शामिल हैं—
- नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA)
- इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA)
- पेरिस का कमांड एंड स्टाफ कोर्स
- नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC)
उनकी रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें भारतीय सेना के सबसे सक्षम अधिकारियों में गिना जाता है।
मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान
अपने उत्कृष्ट सैन्य योगदान के लिए जनरल धीरज सेठ को कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें शामिल हैं—
- परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM)
- उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM)
- अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)
ये सम्मान भारतीय सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और नेतृत्व क्षमता को दर्शाते हैं।
सैन्य परंपरा वाले परिवार से रखते हैं संबंध
जनरल धीरज सेठ का परिवार भी लंबे समय से भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ा रहा है।
उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। वह एडजुटेंट जनरल के पद पर भी रहे और सेवानिवृत्ति के बाद छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
उनके छोटे भाई रवनीश सेठ भारतीय नौसेना में रियर एडमिरल हैं और वर्तमान में कारवार में तैनात हैं। पिता और पुत्र दोनों का सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभालना भारतीय सैन्य इतिहास की एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है।
