आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत। नाबालिग से रेप मामले में अंतरिम जमानत की मांग पर कोर्ट ने कहा— पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुनेंगे, फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुना जाएगा, उसके बाद ही इस मामले में आगे विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अभी हम आसाराम को जमानत नहीं दे सकते. हमें पहले राजस्थान सरकार पक्ष सुनना होगा. आसाराम एक प्रभावशाली हैसियत रखते हैं, जमानत पर सुनवाई करते हुए हमें यह भी देखना होगा.’
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल आसाराम को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए उसका जवाब मांगा है।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए जमानत पर फैसला लेते समय सभी परिस्थितियों और संभावित प्रभावों पर विचार करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य आधार पर मांगी थी अंतरिम जमानत
आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने अदालत में दलील दी कि उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत देने की मांग की गई।
वकील ने यह भी दावा किया कि उनके मुवक्किल को “सोशल मीडिया ट्रायल” का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि पीड़ित पक्ष के वकील ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि मामला एक नाबालिग पीड़िता से जुड़ा गंभीर अपराध है और इसे उसी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
गंभीर स्वास्थ्य स्थिति होने पर ही होगा विचार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल सजा पर रोक लगाने पर विचार नहीं कर रहा है।
अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में कोई ऐसी गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे आरोपी के जीवन को वास्तविक खतरा हो, तभी अंतरिम राहत पर विचार किया जा सकता है।
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाल ही में आसाराम को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया था और वर्तमान में उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।
राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें वर्ष 2013 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।
साथ ही उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की भी मांग की है।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
राजस्थान हाई कोर्ट ने मई 2026 में अपने फैसले में सह-आरोपियों को बरी कर दिया था। साथ ही गैंगरेप और POCSO अधिनियम की कुछ धाराओं से भी आसाराम को राहत दी गई थी।
हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म के अपराध में उनकी दोषसिद्धि को सही माना और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है और अंतरिम जमानत पर कोई तत्काल राहत देने से इनकार किया है। अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार का पक्ष और अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद ही अदालत आगे का निर्णय लेगी। तब तक आसाराम को जेल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सकीय सुविधाएं जारी रखने का निर्देश भी दिया गया है.
