सब्जी की खेती में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा चाहते हैं? कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सब्जी बोने से पहले खेत में ढैंचा और सनै जैसे हरी खाद वाले बीज बोने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक खाद का खर्च घटता है और पैदावार में सुधार होता है।

खेती में बढ़ती लागत और घटती उर्वरता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को सब्जी की फसल लगाने से पहले खेत में हरी खाद (ग्रीन मैन्योर) वाली फसलें उगाने की सलाह दे रहे हैं। खासकर ढैंचा (Dhaincha) और सनै (Sunhemp) जैसे बीज खेत में बोने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है और सब्जियों का उत्पादन बेहतर मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सब्जी की खेती से पहले इन बीजों का उपयोग करें तो उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ मुनाफा भी बढ़ सकता है।
क्या है हरी खाद की खेती?
हरी खाद ऐसी फसल होती है जिसे उगाने के बाद खेत में ही पलट दिया जाता है। इससे पौधे मिट्टी में सड़कर जैविक खाद का काम करते हैं। ढैंचा और सनै जैसी दलहनी फसलें वातावरण से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जमा करती हैं, जिससे जमीन की उर्वरता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
ढैंचा बीज के फायदे
ढैंचा को हरी खाद का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसकी फसल 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके प्रमुख फायदे हैं:
- मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है।
- नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है।
- खेत की जल धारण क्षमता में सुधार होता है।
- रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होती है।
- सब्जियों की पैदावार और गुणवत्ता बेहतर होती है।
कैसे करें उपयोग?
किसान सब्जी की बुवाई से लगभग 45 दिन पहले ढैंचा या सनै के बीज खेत में बो सकते हैं। जब पौधे 4 से 5 फीट ऊंचे हो जाएं तो उन्हें ट्रैक्टर या हल की मदद से मिट्टी में पलट दें। करीब 15 से 20 दिन बाद खेत सब्जी लगाने के लिए तैयार हो जाता है।
किन सब्जियों में मिलेगा फायदा?
हरी खाद का उपयोग करने से टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, लौकी, खीरा, गोभी और अन्य सब्जियों की खेती में अच्छे परिणाम मिलते हैं। इससे पौधों की वृद्धि तेज होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
लागत कम, कमाई ज्यादा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार हरी खाद का उपयोग करने वाले किसानों को रासायनिक खाद पर कम खर्च करना पड़ता है। साथ ही मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है। इससे खेती टिकाऊ बनती है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होती है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में हरी खाद की खेती को अपनाकर किसान प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं। यह तरीका पर्यावरण के लिए भी लाभदायक माना जाता है।
अगर किसान सब्जी की खेती से अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा चाहते हैं तो ढैंचा और सनै जैसे हरी खाद वाले बीजों का उपयोग एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।
