केतन अग्रवाल हत्याकांड: दुकान पर छोड़ा फोन, पहनी हुडी और बंद किया इंटरनेट, ऐसे खुला राज

पुणे मर्डर केस का आरोपी चेतन
महाराष्ट्र के पुणे जिले में चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और पुलिस को भ्रमित करने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए थे। उसने अपना मोबाइल फोन एक दुकान पर छोड़ दिया, मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया और भीषण गर्मी के बावजूद हुडी पहनकर चेहरे को ढंक लिया। लेकिन यही सावधानियां आखिरकार उसके खिलाफ सबसे बड़े सबूत बन गईं।
लोहागढ़ किले के CCTV में कैद हुआ संदिग्ध
पुलिस जांच के दौरान पुणे के प्रसिद्ध लोहागढ़ किला इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध युवक कैमरे में कैद हुआ, जिसकी गतिविधियों ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा।
फुटेज में युवक ने अपना चेहरा नकाब से पूरी तरह ढंक रखा था। उसके सिर पर हुडी का कैप था और कानों में हेडफोन लगे हुए थे। वह लगातार गर्दन झुकाकर चल रहा था ताकि कैमरों में उसका चेहरा स्पष्ट न दिख सके। लोहगढ़ फोर्ट के टिकट काउंटर पर लगे सीसीटीवी में यह शख्स 18 जून को कैद हुआ. बाद में इस शख्स की पहचान केतन की मौत की आरोपी मंगेतर सिया गोयल के कथित प्रेमी चैतन चौधरी के रूप में हुई. चेतन इन दोनों का पीछा करते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ. इसके कुछ घंटों बाद केतन की मौत हो गई.
गर्मी में हुडी पहनना बना शक की वजह
जांच अधिकारियों के अनुसार जिस समय यह फुटेज रिकॉर्ड हुई, उस दौरान इलाके में काफी गर्मी थी। ऐसे मौसम में हुडी पहनकर और चेहरा ढंककर घूमना असामान्य माना गया। इसी बात ने पुलिस को संदिग्ध की गतिविधियों की गहराई से जांच करने के लिए प्रेरित किया।
पुलिस ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले और संदिग्ध की आवाजाही का पूरा रूट तैयार किया।
मोबाइल फोन छोड़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने घटना के दौरान अपना मोबाइल फोन एक दुकान पर छोड़ दिया था। उसका मकसद था कि मोबाइल लोकेशन किसी अन्य स्थान पर दिखाई दे और पुलिस को उसकी वास्तविक गतिविधियों का पता न चल सके।
इतना ही नहीं, उसने अपने मोबाइल का इंटरनेट भी बंद कर दिया था ताकि डिजिटल ट्रैकिंग से बचा जा सके। हालांकि पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से उसकी योजना को नाकाम कर दिया।
कई सुरागों को जोड़कर पहुंची पुलिस
जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, स्थानीय लोगों से पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध की पहचान सुनिश्चित की। पुलिस ने पाया कि आरोपी लगातार अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी हर चाल जांच टीम के लिए एक नया सुराग बनती चली गई।
अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल फोरेंसिक जांच के कारण आरोपी ज्यादा समय तक पुलिस से बच नहीं सका।
हत्याकांड ने मचाई थी सनसनी
केतन अग्रवाल की हत्या की घटना सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। पुलिस पर जल्द से जल्द मामले का खुलासा करने का दबाव था। जांच टीम ने कई दिनों तक लगातार साक्ष्य जुटाए और घटनास्थल से लेकर आरोपी की गतिविधियों तक हर पहलू की पड़ताल की।
तकनीक और CCTV बने सबसे बड़े हथियार
इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितनी भी सावधानी बरत ले, लेकिन सीसीटीवी नेटवर्क, डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी जांच एजेंसियों के लिए अपराध की गुत्थी सुलझाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा अपनाई गई हर चाल अंततः उसके खिलाफ सबूत में बदल गई और इन्हीं सुरागों की मदद से केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई जा सकी।
