भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय हितों के खिलाफ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होने चाहिए और किसानों के हितों की रक्षा जरूरी है।

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की नीति बंद करनी चाहिए और देश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
जयराम रमेश ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (US Delegation) भारत दौरे पर है। ऐसे समय में केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी समझौते में भारतीय किसानों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के हितों से समझौता न हो।
‘भारतीय हितों के खिलाफ डील स्वीकार नहीं’
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय हितों के खिलाफ जाता है तो भारत को उस पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के साथ समझौते को लेकर जल्दबाजी दिखा रही है, जबकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है।
रमेश ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए, न कि विदेशी दबाव में फैसले लेना।
किसानों पर पड़ सकता है असर
कांग्रेस ने दावा किया कि अमेरिका के साथ जिस तरह के व्यापार समझौते की चर्चा चल रही है, उसका असर देश के कई राज्यों के किसानों पर पड़ सकता है। पार्टी के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसानों को इससे नुकसान होने की आशंका है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए तो भारतीय किसानों को अमेरिकी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी आय और बाजार हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
टैरिफ और व्यापार नीति पर उठे सवाल
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि अगर भारत और अमेरिका के बीच समझौता हो भी जाता है, तो इसकी क्या गारंटी है कि भविष्य में अमेरिका एकतरफा टैरिफ नहीं लगाएगा या व्यापारिक दबाव नहीं बनाएगा। पार्टी का कहना है कि अमेरिका पहले भी कई देशों के साथ व्यापारिक नीतियों में अचानक बदलाव करता रहा है।
विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित समझौते की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए ताकि देश को पता चल सके कि किन मुद्दों पर बातचीत हो रही है और उसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि संभावित व्यापार समझौता निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
हालांकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
राजनीतिक बहस तेज
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। जहां सरकार इसे आर्थिक विकास का अवसर बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
