इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में 150 बच्चों के बीमार होने से हड़कंप मच गया। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने दो दिन तक मामले की जानकारी छिपाई।

इंदौर। शहर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक करीब 150 छात्रों की तबीयत खराब होने के बाद अभिभावकों में हड़कंप मच गया। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने मामले को लगभग दो दिन तक सार्वजनिक नहीं किया और अभिभावकों को समय पर पूरी जानकारी नहीं दी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कई अभिभावकों ने स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप पर बच्चों में एक जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायतें साझा करनी शुरू कीं। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों के बीमार होने की जानकारी सामने आई और प्रशासन हरकत में आया।
व्हाट्सएप ग्रुप से सामने आई सच्चाई
अभिभावकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कई बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी शिकायतें हो रही थीं। शुरुआत में परिजनों को लगा कि यह सामान्य मौसमी बीमारी हो सकती है, लेकिन जब बड़ी संख्या में बच्चों में एक जैसे लक्षण दिखाई देने लगे तो उन्होंने स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप पर इसकी चर्चा शुरू की।
धीरे-धीरे सामने आया कि कई कक्षाओं के छात्र प्रभावित हुए हैं। इसके बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा और प्रशासन को भी सूचना दी।
फूड पॉइजनिंग की आशंका
प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
बीमार छात्रों का विभिन्न अस्पतालों और क्लीनिकों में उपचार किया गया। अधिकांश बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और कई छात्र उपचार के बाद घर लौट चुके हैं।
स्कूल का किचन सील
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल पहुंची। जांच के दौरान स्कूल के किचन को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने भोजन तैयार करने और भंडारण की व्यवस्था का निरीक्षण किया।
स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य सामग्री, पानी और अन्य उपयोगी वस्तुओं के 23 सैंपल जांच के लिए एकत्र किए हैं। इन सैंपलों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां उनकी विस्तृत जांच की जाएगी।
अभिभावकों में नाराजगी
घटना के बाद अभिभावकों में स्कूल प्रबंधन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि यदि स्कूल समय रहते जानकारी साझा करता तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
कई अभिभावकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रशासन ने शुरू की जांच
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और स्वयं दवा देने से बचें।
रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले में लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत खराब होने के पीछे भोजन, पानी या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
