
नई दिल्ली, 28 मार्च।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहे दो और जहाज शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की संभावना है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हाल ही में ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद इस जलमार्ग पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ होने का दावा किया, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोत प्रमुख बंदरगाहों के पास तैनात हैं ताकि जरूरत पड़ने पर जहाजों को सहायता दी जा सके। आने वाले दिनों में और जहाजों के इस मार्ग से भारत पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह जलमार्ग भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे ‘मित्र देशों’ के लिए खुला है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि एलपीजी से भरे चार जहाज पहले ही होर्मुज पार कर भारत पहुंच चुके हैं। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रहा है।
एक संयुक्त मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में किसी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई है। फारस की खाड़ी में करीब 20 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 540 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं।
सिन्हा ने यह भी बताया कि देश के सभी बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी जाम या रुकावट की कोई जानकारी नहीं है।
हालांकि, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संघर्ष के बाद इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। ईरान केवल कुछ जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिससे देरी हो रही है और कुछ जहाज फंसे हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार गुजरता है। इसलिए यहां का कोई भी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।
