वीकेंड में ज्यादा सोकर पूरे हफ्ते की नींद पूरी करने की आदत हमेशा सही नहीं होती। जानिए क्यों नियमित और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।

सोमवार से शुक्रवार तक कम सोना और शनिवार-रविवार को देर तक सोकर नींद पूरी करने की कोशिश आजकल बहुत आम हो गई है। कई लोगों को लगता है कि सप्ताहभर की नींद की कमी की भरपाई वीकेंड की लंबी नींद से आसानी से की जा सकती है। हालांकि, नींद विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से कम सोने की आदत को सिर्फ दो दिन ज्यादा सोकर पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। बेहतर स्वास्थ्य के लिए पूरे सप्ताह पर्याप्त और नियमित नींद लेना ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज की व्यस्त जीवनशैली में ऑफिस, पढ़ाई, मोबाइल, सोशल मीडिया और देर रात तक जागने की आदत के कारण लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। ऐसे में वीकेंड पर देर तक सोना शरीर को थोड़ी राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इसे रोजाना की नींद की कमी का स्थायी समाधान नहीं माना जाना चाहिए।
कम नींद से बनता है ‘स्लीप डेट’
जब किसी व्यक्ति को लगातार उसकी जरूरत से कम नींद मिलती है, तो शरीर में नींद की कमी जमा होती जाती है। इसे आमतौर पर स्लीप डेट (Sleep Debt) कहा जाता है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को रोजाना 7-8 घंटे की नींद की जरूरत है, लेकिन वह लगातार पांच दिनों तक केवल 5-6 घंटे सोता है। ऐसे में सप्ताह के अंत तक उसके शरीर में नींद की कमी जमा हो सकती है।
वीकेंड में कुछ घंटे ज्यादा सोने से थकान, उनींदापन और मूड में थोड़े समय के लिए सुधार महसूस हो सकता है। लेकिन इससे पूरे सप्ताह की खराब स्लीप रूटीन खत्म नहीं हो जाती। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि नींद की कमी को लगातार जमा होने ही न दिया जाए।
क्या वीकेंड में ज्यादा सोना नुकसानदायक है?
जरूरत के मुताबिक वीकेंड में थोड़ी अतिरिक्त नींद लेना हमेशा खराब नहीं माना जाता। अगर किसी दिन आपकी नींद कम हुई है, तो अगले दिन कुछ अतिरिक्त आराम शरीर को रिकवर करने में मदद कर सकता है।
समस्या तब शुरू हो सकती है जब हर सप्ताह कई घंटे कम सोने के बाद शनिवार और रविवार को बहुत देर तक सोने की आदत बन जाए। इससे सोने और जागने का समय अचानक बदल सकता है और शरीर की नियमित नींद-जागने की लय प्रभावित हो सकती है।
इसीलिए विशेषज्ञ आमतौर पर पूरे सप्ताह सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा रखने की सलाह देते हैं।
रिसर्च में क्या सामने आया?
वीकेंड में नींद पूरी करने को लेकर रिसर्च के सभी नतीजे एक जैसे नहीं हैं। कुछ अध्ययनों में वीकेंड की अतिरिक्त नींद से थकान और नींद की कमी से जुड़े कुछ लक्षणों में राहत मिलने की बात सामने आई है, जबकि कुछ शोध यह संकेत देते हैं कि यह पूरे सप्ताह की अपर्याप्त नींद का पूर्ण विकल्प नहीं है।
2024 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में 73,000 से ज्यादा लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें वीकेंड में अधिक सोने और मृत्यु या हृदय रोग के जोखिम के बीच कोई स्पष्ट सीधा संबंध नहीं पाया गया। इसलिए वीकेंड की अतिरिक्त नींद को लेकर एकतरफा निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरी नींद की दिनचर्या को देखना ज्यादा जरूरी है।
बहुत देर तक सोने से क्यों बचें?
अगर कोई व्यक्ति रोजाना सुबह 6 या 7 बजे उठता है और वीकेंड पर अचानक दोपहर तक सोता रहता है, तो उसके स्लीप शेड्यूल में बड़ा बदलाव हो सकता है।
ऐसा करने से रविवार रात को सामान्य समय पर नींद आने में परेशानी हो सकती है। इसके बाद सोमवार सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो सकता है और व्यक्ति नए सप्ताह की शुरुआत ही थकान के साथ कर सकता है।
इसलिए वीकेंड पर जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त नींद लें, लेकिन सोने और उठने के समय में बहुत बड़ा अंतर रखने से बचना बेहतर है।
किशोरों के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी
नींद की जरूरत उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है। 13 से 18 साल के किशोरों को आमतौर पर 8 से 10 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
किशोरावस्था में पर्याप्त नींद शरीर और दिमाग के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। अच्छी नींद ध्यान लगाने, सीखने, याददाश्त, मूड और दिन के समय सतर्क रहने में भी मदद करती है।
इसलिए बच्चों और किशोरों के लिए देर रात तक मोबाइल चलाना, पढ़ाई या मनोरंजन के कारण नींद को लगातार कम करना अच्छी आदत नहीं मानी जाती।
नींद का समय रखें लगभग एक जैसा
अच्छी नींद के लिए सिर्फ घंटों की संख्या ही नहीं, बल्कि नियमितता भी महत्वपूर्ण है। कोशिश करें कि रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रहे।
बेहतर स्लीप रूटीन के लिए अपनाएं ये आदतें
- रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
- सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- शाम के बाद ज्यादा कैफीन लेने से बचें।
- सोने की जगह को शांत, आरामदायक और कम रोशनी वाला रखें।
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- वीकेंड पर जरूरत के मुताबिक थोड़ी अतिरिक्त नींद ले सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा देर तक सोने की आदत न बनाएं।
- अगर लगातार नींद आने, खर्राटों, रात में बार-बार जागने या दिनभर अत्यधिक थकान जैसी समस्या रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
क्या वीकेंड की नींद पूरी तरह बेकार है?
ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अगर किसी दिन आपकी नींद कम हुई है, तो अतिरिक्त नींद लेने से शरीर को कुछ हद तक आराम मिल सकता है। लेकिन अगर हर सप्ताह पांच दिन कम सोकर दो दिन ज्यादा सोना आपकी नियमित आदत बन गई है, तो यह स्वस्थ स्लीप रूटीन का विकल्प नहीं है। सीधी बात यह है कि नींद की कमी को वीकेंड पर जमा करके पूरा करने के बजाय हर दिन पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कभी-कभार अतिरिक्त नींद लेना अलग बात है, लेकिन लगातार कम सोना और फिर वीकेंड पर लंबी नींद लेना लंबे समय तक चलने वाली अच्छी आदत नहीं मानी जाती।
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य एवं नींद से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। यह किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। नींद से जुड़ी लगातार या गंभीर समस्या होने पर योग्य डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लें।
