छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों ने UPI को गांव-गांव और गली-गली पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 94% छोटे कारोबारियों ने UPI अपनाया है। 📱💳

भारत में डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ बड़े शहरों, मॉल या कॉरपोरेट दुकानों तक सीमित नहीं है। चाय की छोटी दुकान, मोहल्ले की किराना दुकान और सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले दुकानदार भी इस डिजिटल क्रांति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। एक सरकारी स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि छोटे कारोबारियों के बीच UPI की पहुंच बेहद तेजी से बढ़ी है। आज 10 रुपये की चाय हो या 50 रुपये की सब्जी, ग्राहक को जेब में कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ती। दुकान पर लगा QR कोड स्कैन किया और कुछ ही सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है। डिजिटल पेमेंट को रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बनाने में इन छोटे कारोबारियों की भूमिका बेहद अहम रही है।
94 फीसदी छोटे दुकानदारों ने अपनाया UPI….
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से जारी एक सरकारी स्टडी में डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल की तस्वीर सामने आई है। सर्वे में शामिल छोटे कारोबारियों में 94 फीसदी ने UPI को अपनाया हुआ है। इस स्टडी में 15 राज्यों के कुल 10,378 लोगों को शामिल किया गया था। इनमें 6,167 यूजर्स, 2,199 मर्चेंट और 2,012 सर्विस प्रोवाइडर्स शामिल थे। आंकड़े बताते हैं कि UPI अब केवल शहरी बाजारों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों, कस्बों और स्थानीय बाजारों में भी चाय वाले, किराना दुकानदार, सब्जी विक्रेता और दूसरे छोटे कारोबारी QR कोड के जरिए पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट से दुकानदारों को क्या फायदा हुआ….?
सरकारी स्टडी के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट अपनाने वाले 72 फीसदी दुकानदार इससे संतुष्ट हैं। दुकानदारों ने तेज ट्रांजैक्शन, पेमेंट का रिकॉर्ड रखने में आसानी और कारोबार चलाने में सुविधा को इसके प्रमुख फायदे बताया। वहीं, 57 फीसदी दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट अपनाने के बाद बिक्री बढ़ने की बात कही। यह भी स्पष्ट किया कि बिक्री में हुई बढ़ोतरी का पूरा श्रेय केवल UPI को नहीं दिया जा सकता। डिजिटल पेमेंट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि हर लेन-देन का रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। ग्राहक के पास कैश नहीं होने पर भी खरीदारी जारी रहती है और दुकानदार को खुले पैसे रखने की परेशानी कम होती है।
सरकारी प्रोत्साहन योजना से मिली मदद….
छोटे कारोबारियों तक डिजिटल पेमेंट पहुंचाने में QR कोड के साथ-साथ सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं ने भी भूमिका निभाई। सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की थी, जिसे वित्त वर्ष 2024-25 तक जारी रखा गया। इस प्रोत्साहन से दुकानदारों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों की लागत संबंधी बाधाओं को कम करने, नए मर्चेंट जोड़ने और डिजिटल पेमेंट को लेकर भरोसा बढ़ाने में मदद मिली।
9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हुए “UPI QR”….
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से बढ़ा है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोत्साहन योजना की अवधि के दौरान UPI QR की संख्या करीब 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गई। इसी अवधि में UPI पर काम करने वाले बैंकों की संख्या भी मार्च 2021 के 216 से बढ़कर मार्च 2025 में 661 हो गई। वहीं, थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स की संख्या 16 से बढ़कर 38 हो गई।
7 करोड़ तक मर्चेंट्स डिजिटल पेमेंट से जुड़े….
UPI की पहुंच का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि NPCI और Boston Consulting Group की एक रिपोर्ट के अनुसार, साउंडबॉक्स और इंटरऑपरेबल QR कोड ने करीब 6.5 करोड़ से 7 करोड़ मर्चेंट्स को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने में मदद की है। इनमें बड़ी संख्या सड़क किनारे सामान बेचने वालों, चाय की दुकानों और मोहल्ले की किराना दुकानों की है।
UPI की कहानी सिर्फ बड़े ऐप्स की नहीं….
भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति को अक्सर बड़े पेमेंट ऐप्स और तकनीकी कंपनियों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इसकी असली पहुंच उस समय दिखाई देती है जब एक छोटी चाय की दुकान या सड़क किनारे सब्जी बेचने वाला भी ग्राहक से QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करता है। यही छोटे दुकानदार भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की जमीनी ताकत बन चुके हैं। UPI ने जहां पेमेंट को आसान बनाया है, वहीं छोटे कारोबारियों ने इसे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
