
नई दिल्ली, 12 फरवरी। वरुण सिंह भाटी पैरालंपिक में ऊंची कूद में पदक जीतने वाले भारत के शीर्ष पैरा एथलीटों में शामिल हैं। 6 महीने की उम्र में पोलियो का शिकार होने के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत और समर्पण से देश का नाम रोशन किया।
वरुण का जन्म 13 फरवरी 1995 को नोएडा में हुआ था। पोलियो और गलत दवा की वजह से एक पैर में स्थायी विकलांगता आ गई। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाले वरुण ने बास्केटबॉल के बाद ऊंची कूद में करियर बनाने का फैसला किया। पूर्व राष्ट्रीय एथलीट सत्यनारायण की कोचिंग और गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन के पैरा चैंपियंस प्रोग्राम ने उनके सफर को मजबूती दी।
टी42 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने वाले वरुण ने 2012 में 1.60 मीटर की छलांग लगाकर लंदन पैरालिंपिक के लिए ‘ए’ क्वालिफिकेशन मार्क हासिल किया। 2014 एशियन पैरा गेम्स और चाइना ओपन में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
2016 में उन्होंने आईपीसी एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में 1.82 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण और एशियन रिकॉर्ड अपने नाम किया। उसी साल रियो पैरालिंपिक में 1.86 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। 2017 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी कांस्य और 2018 एशियन पैरा गेम्स में 1.82 मीटर की छलांग पर रजत पदक हासिल किया।
भारत सरकार ने उनके शानदार प्रदर्शन और देश को गौरवान्वित करने के लिए 29 अगस्त 2018 को उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
