
प्रयागराज, 10 फरवरी
संभल हिंसा मामला एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुर्खियों में है। संभल के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनुज चौधरी की याचिका पर मंगलवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। इस दौरान सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखेंगे।
सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और एएसपी अनुज चौधरी द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इन याचिकाओं में संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गई है।
यह मामला नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा से जुड़ा हुआ है। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति समित गोपाल सुनवाई कर रहे हैं। पिछले माह घायल युवक के पिता यामीन की अर्जी पर संभल के तत्कालीन सीजेएम ने एएसपी अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
यामीन ने आरोप लगाया था कि हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसके बेटे को जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी।
राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और अधिवक्ता एके संड ने अदालत में पक्ष रखा। अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 175 के तहत आदेश पारित करते समय कानून में निहित अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी की।
उन्होंने कहा कि बीएनएसएस की धारा 175(4) के अनुसार किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच का आदेश देने से पहले दो-चरणीय अनिवार्य प्रक्रिया का पालन जरूरी है, जो इस मामले में नहीं किया गया।
राज्य सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसने पहले संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई थी या नहीं, जबकि यह कानूनी रूप से आवश्यक शर्त है।
अपर महाधिवक्ता ने कहा कि सीजेएम ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया और पुलिस रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि घटना से संबंधित मुकदमा पहले से दर्ज है और उसकी जांच चल रही है।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि नवंबर 2024 की संभल हिंसा कोई एकल घटना नहीं थी, बल्कि उस स्थान पर उत्पन्न अव्यवस्था और तनाव का परिणाम थी।
फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई में अहम कानूनी पहलुओं पर फैसला होने की संभावना है।
