💸 क्या आपकी जेब में जल्द प्लास्टिक के नोट आने वाले हैं? RBI की तैयारी के मुताबिक 10 और 20 रुपये के नोट पॉलिमर (Plastic) नोटों में बदले जा सकते हैं। जानिए क्या होंगे इसके फायदे और कब शुरू हो सकता है यह बदलाव।

भारत में जल्द ही 10 और 20 रुपये के नोटों का स्वरूप बदल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों के लिए आवश्यक सामग्री की खरीद प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि देश में छोटे मूल्यवर्ग के नोट जल्द ही प्लास्टिक के रूप में देखने को मिल सकते हैं।हालांकि RBI ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में भारतीय करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है।
क्या हैं पॉलिमर या प्लास्टिक नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बनाए जाते। इन्हें एक विशेष प्रकार की मजबूत पॉलिमर फिल्म पर छापा जाता है, जिस पर सफेद कोटिंग की जाती है ताकि नोट की डिजाइन और सुरक्षा फीचर्स स्पष्ट दिखाई दें। इन नोटों की सबसे खास पहचान इनकी पारदर्शी विंडो (Transparent Window) होती है, जो नकली नोटों की पहचान को आसान बनाती है और जालसाजी की संभावना को काफी कम कर देती है।
क्यों बदले जा सकते हैं 10 और 20 रुपये के नोट?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पॉलिमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाता है तो सबसे पहले 10 और 20 रुपये के नोटों को चुना जा सकता है।
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- इन नोटों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
- ये जल्दी फट जाते हैं और खराब हो जाते हैं।
- बार-बार नए नोट छापने की लागत बढ़ती है।
- छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की औसत उम्र काफी कम होती है।
इसी वजह से RBI पहले छोटे नोटों पर पॉलिमर तकनीक का परीक्षण कर सकता है।
RBI की तैयारी कितनी गंभीर?
BRBNMPL ने वैश्विक कंपनियों से पॉलिमर शीट की सप्लाई के लिए Expression of Interest (EOI) आमंत्रित किया है। यह वही संस्था है जो मैसूरु और सालबोनी स्थित प्रेस में भारतीय करेंसी छापती है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक विचार नहीं बल्कि तैयारी की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि अभी यह शुरुआती चरण में है और बाजार में तुरंत प्लास्टिक नोट आने की संभावना नहीं है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
5 जून 2026 को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है।उन्होंने स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक अभी इसके लाभ और संभावित चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है तथा अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
नई नहीं है यह योजना …..
भारत में पॉलिमर नोटों की चर्चा पहली बार करीब 14 साल पहले शुरू हुई थी।
प्रमुख घटनाक्रम
- 2009: पहली बार पॉलिमर नोटों पर विचार शुरू हुआ।
- 2012: केंद्र सरकार ने 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी।
- 2014: कोच्चि, जयपुर, मैसूरु, शिमला और भुवनेश्वर में परीक्षण की योजना बनी।
- 2016: सामग्री खरीद प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तकनीकी कारणों से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
- 2026: BRBNMPL द्वारा नए सिरे से वैश्विक स्तर पर रुचि आमंत्रित की गई।
आखिर अब क्यों बढ़ी जरूरत?
भारत में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी का उपयोग भी लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।
मई 2026 तक देश में प्रचलन में नकदी का कुल मूल्य लगभग 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इसके अलावा:
- हर साल बड़ी संख्या में पुराने और खराब नोट नष्ट किए जाते हैं।
- 2024-25 में लगभग 23.8 अरब नोट चलन से हटाए गए।
- नए नोट छापने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
ऐसे में अधिक टिकाऊ नोट सरकार और RBI के लिए लागत कम करने का एक विकल्प बन सकते हैं।
प्लास्टिक नोटों के फायदे
1. लंबी उम्र
पॉलिमर नोट कागज के नोटों की तुलना में लगभग 2.5 से 4 गुना अधिक समय तक चल सकते हैं।
2. पानी से सुरक्षित
ये आसानी से भीगते या खराब नहीं होते।
3. कम फटते हैं
इनकी मजबूती अधिक होती है, इसलिए बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़ती है।
4. स्वच्छता बेहतर
अध्ययनों में पाया गया है कि इनकी सतह पर बैक्टीरिया अपेक्षाकृत कम टिकते हैं।
5. नकली नोटों पर रोक
इनमें मौजूद आधुनिक सुरक्षा फीचर्स और पारदर्शी विंडो इन्हें कॉपी करना मुश्किल बनाते हैं।
क्या हैं चुनौतियां?
फायदों के साथ कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं।
शुरुआती लागत अधिक
पॉलिमर नोटों के लिए विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसे फिलहाल विदेशों से मंगाना पड़ सकता है।
ATM अपग्रेड करने होंगे
देशभर के ATM और नोट गिनने वाली मशीनों को नए नोटों के अनुरूप अपडेट करना पड़ सकता है।
मौसम का प्रभाव
भारत जैसे गर्म और विविध जलवायु वाले देश में इन नोटों की व्यवहारिकता का परीक्षण जरूरी होगा।
उपयोग संबंधी शिकायतें
कुछ देशों में लोगों ने शिकायत की है कि पॉलिमर नोट आपस में चिपक जाते हैं और मोड़ने पर स्थायी सिलवटें पड़ सकती हैं।
दुनिया के किन देशों में चल रहे हैं प्लास्टिक नोट?
ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट जारी किए थे। इसके बाद कई देशों ने इस तकनीक को अपनाया।
इन देशों में प्रमुख हैं:
- ऑस्ट्रेलिया
- कनाडा
- ब्रिटेन
- न्यूजीलैंड
- सिंगापुर
- मलेशिया
- वियतनाम
- ब्रुनेई
आज दुनिया के 40 से अधिक देशों में पॉलिमर करेंसी का उपयोग किया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल EOI जारी होना केवल शुरुआती कदम है। इसके बाद:
- तकनीकी मूल्यांकन
- सुरक्षा परीक्षण
- सैंपल प्रोडक्शन
- पायलट प्रोजेक्ट
- फील्ड ट्रायल
जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो सबसे पहले 10 और 20 रुपये के नोट पॉलिमर स्वरूप में बाजार में आ सकते हैं। शुरुआत में कागज और प्लास्टिक दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलन में रह सकते हैं।
निष्कर्ष…..
भारत में पॉलिमर नोटों की वापसी की चर्चा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर दिखाई दे रही है। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन RBI और BRBNMPL की हालिया गतिविधियां संकेत देती हैं कि भविष्य में भारतीय करेंसी अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक स्वरूप में नजर आ सकती है। फिलहाल आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे और किसी भी बदलाव की आधिकारिक घोषणा RBI द्वारा ही की जाएगी।
