तमिलनाडु में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।

तमिलनाडु में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगाई और मामले में नोटिस जारी किया है। इस फैसले के बाद तमिलनाडु में गौहत्या को लेकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था फिलहाल यथावत बनी रहेगी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई होने तक मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया जाएगा। अब इस मामले पर अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि हाईकोर्ट का फैसला संविधान और राज्य के प्रचलित कानूनों के अनुरूप था या नहीं।
क्या था मद्रास हाईकोर्ट का आदेश?
मद्रास हाईकोर्ट ने 27 मई को दिए गए अपने फैसले में तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य में बकरीद सहित किसी भी अवसर पर गाय और बछड़ों की हत्या न होने दी जाए। अदालत ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 48 और वर्ष 1976 में जारी राज्य सरकार के गौहत्या निषेध संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया था।
हाईकोर्ट का मानना था कि गायों और बछड़ों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए और किसी भी प्रकार की अवैध हत्या पर प्रभावी रोक लगानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की दलील
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मूल याचिका केवल बकरीद के दौरान वैध बूचड़खानों के बाहर कथित रूप से गायों और बछड़ों की बलि से जुड़े आरोपों तक सीमित थी। सरकार का तर्क था कि हाईकोर्ट ने याचिका के मूल दायरे से आगे बढ़कर पूरे राज्य में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया।
सरकार ने यह भी बताया कि तमिलनाडु के मौजूदा कानूनों के तहत 10 वर्ष से अधिक आयु के कुछ गोवंशों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश राज्य के लागू कानूनों से परे जाकर दिया गया प्रतीत होता है।
