शेयर बाजार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा! 📉🛢️ चीन की तेल खरीदारी बढ़ी तो महंगा कच्चा तेल मार्केट में मचा सकता है हलचल।

भारतीय शेयर बाजार पहले से ही दबाव में है और अब कच्चे तेल को लेकर एक नई चिंता सामने आ रही है। UBS के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार भानु बावेजा के मुताबिक, अगर चीन की तेल मांग तेजी से बढ़ती है और होर्मुज रूट से सप्लाई में रुकावट बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है और भारत भी इससे प्रभावित हो सकता है।
चीन की एंट्री से क्यों बढ़ी चिंता…..?
रिपोर्ट के मुताबिक, साल की शुरुआत में चीन की तरफ से तेल की खरीदारी कमजोर थी। इससे सप्लाई में बाधा के बावजूद बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव सीमित रहा। अब चीन की मांग दोबारा बढ़ने लगी है। ऐसे समय में अगर चीन के साथ वे एयरलाइंस और दूसरी कंपनियां भी तेल खरीदने के लिए बाजार में लौटती हैं, जिन्होंने कीमतों में गिरावट के इंतजार में खरीदारी टाल रखी थी, तो मांग और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ तेल की सप्लाई अभी भी प्रभावित बताई जा रही है। ऐसे में कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ने की आशंका है।
होर्मुज में तेल सप्लाई पर कितना असर…..?
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज रूट से पहले रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे। सप्लाई में रुकावट के बाद यह मात्रा घटकर करीब 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई है। इसका मतलब है कि लगभग 14 मिलियन बैरल की सप्लाई इस रास्ते से प्रभावित है। यही स्थिति बाजार के लिए बड़ी चिंता का कारण बन रही है।
तेल महंगा हुआ तो भारत पर ज्यादा असर क्यों…..?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए दूसरे देशों से आयात पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। महंगा कच्चा तेल ईंधन की लागत बढ़ाने के साथ-साथ कंपनियों के परिवहन और उत्पादन खर्च को प्रभावित कर सकता है। इससे कंपनियों के मुनाफे और बाजार की धारणा पर दबाव आने की संभावना रहती है।
महंगाई का भी बढ़ सकता है खतरा…..
तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। रिपोर्ट के मुताबिक, नेफ्था और उर्वरक जैसी चीजों की लागत भी बढ़ सकती है। आगे चलकर महंगे उर्वरक का असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। यानी कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही तो इसका असर शेयर बाजार के साथ आम लोगों के खर्च पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आएगी…..?
UBS रणनीतिकार ने तेल की सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट और चीन की बढ़ती मांग को संभावित जोखिम बताया है। उनका मानना है कि अगर तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो शेयर बाजारों में भारी गिरावट का दबाव बन सकता है, जिसमें भारतीय बाजार भी शामिल है। यह एक संभावित जोखिम का आकलन है, बाजार में गिरावट निश्चित होने की घोषणा नहीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता के संकेतों के बावजूद शेयरों और करेंसी में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम स्तर के करीब है। इसलिए आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत और उसकी सप्लाई बाजार के लिए बेहद अहम संकेत बन सकती है।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए…..?
तेल की कीमत, वैश्विक सप्लाई, चीन की मांग और होर्मुज रूट से जुड़ी खबरें भारतीय शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की स्थिति और अपने जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।
नोट : यह लेख निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
