राजस्थान के टोंक में जन्मे जय मूंदड़ा ने स्टूडेंट वीजा पर आयरलैंड जाकर पढ़ाई की, क्लब क्रिकेट में मेहनत की और अब भारत के खिलाफ आयरलैंड के लिए टी20 इंटरनेशनल डेब्यू कर सुर्खियां बटोर रहे हैं।

भारत के खिलाफ पहले टी20 मैच में आयरलैंड ने जय मूंदड़ा को प्लेइंग इलेवन में शामिल कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका दिया। 29 वर्षीय जय मूंदड़ा का सफर राजस्थान के एक छोटे शहर से शुरू होकर आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी बन गया है।
राजस्थान के टोंक से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर
जय मूंदड़ा का जन्म 10 जनवरी 1997 को राजस्थान के टोंक में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का शौक था और उन्होंने स्थानीय क्रिकेट अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
करियर की शुरुआत में वह तेज गेंदबाज थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज और स्पिन गेंदबाज के रूप में भी विकसित किया। बाद में उन्होंने फिर से तेज गेंदबाजी पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी गेंदबाजी शैली को निखारा।
नौकरी छोड़ क्रिकेट को दिया आखिरी मौका
जय मूंदड़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने कॉर्पोरेट नौकरी करने का विकल्प था। लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर क्रिकेट में किस्मत आजमाने का फैसला किया।
उनका मानना था कि अगर उस समय नौकरी चुन लेते, तो शायद क्रिकेटर बनने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रह जाता।
पढ़ाई के लिए पहुंचे आयरलैंड
साल 2021 में जय मूंदड़ा उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट वीजा पर आयरलैंड चले गए। वहां उन्होंने एमटेक की पढ़ाई शुरू की और साथ ही क्रिकेट खेलना भी जारी रखा।
डबलिन पहुंचने के बाद उन्होंने लीन्सस्टर क्रिकेट क्लब जॉइन किया। क्लब क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें पहचान दिलाई और 2023 में टीम के साथ आयरिश सीनियर कप जीतने में भी अहम भूमिका निभाई।
घरेलू क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम तक
लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर जय मूंदड़ा ने आयरलैंड के घरेलू क्रिकेट में अपनी जगह मजबूत की। वह एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज और निचले क्रम के आक्रामक बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाने लगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में उन्हें आयरलैंड की नागरिकता मिली, जिसके बाद राष्ट्रीय टीम के लिए उनके चयन का रास्ता साफ हुआ।
भारत के खिलाफ मिला डेब्यू का मौका
आखिरकार भारत के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में जय मूंदड़ा को आयरलैंड की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। अपने जन्म देश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करना उनके करियर का सबसे खास पल बन गया।
युवाओं के लिए मिसाल
जय मूंदड़ा की कहानी यह बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सफलता हासिल की जा सकती है। राजस्थान के टोंक से शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंच चुका है और वह दुनिया भर के युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
