कानपुर में मूक-बधिर बच्ची को मां से मिलवाकर रो पड़ी महिला कॉन्स्टेबल, बोलीं- इसमें मुझे अपनी बेटी दिखी

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से मानवता और संवेदनशील पुलिसिंग की एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। यहां 8 वर्षीय मूक-बधिर बच्ची को उसकी मां से मिलवाने के बाद महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी की आंखें नम हो गईं। बच्ची अपनी मां को देखते ही खुशी से खिलखिला उठी और दौड़कर उनसे लिपट गई। मां-बेटी के इस भावुक मिलन को देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी भावुक हो गए।
महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने कहा कि इस बच्ची में उन्हें अपनी बेटी की झलक दिखाई दी। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं, लेकिन बेटी नहीं है। बच्ची के प्रति उनके मन में इतना स्नेह पैदा हो गया था कि उन्होंने सोचा था कि यदि उसका कोई परिजन नहीं मिला तो वह खुद उसकी परवरिश करेंगी।
खेलते-खेलते घर से दूर पहुंच गई बच्ची
जानकारी के अनुसार, सोमवार को बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान वह एक जुलूस के पीछे-पीछे चलते हुए अपने घर से काफी दूर निकल गई। उस समय उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे।
जब माता-पिता घर लौटे तो बच्ची को घर पर नहीं पाया। उन्होंने आसपास और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और बच्ची की तलाश शुरू कर दी। काफी प्रयासों के बाद पुलिस को बच्ची सुरक्षित मिली। चूंकि वह मूक-बधिर थी, इसलिए उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचने में पुलिस को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।
महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने बच्ची की देखभाल की और उसे सुरक्षित रखा। इस दौरान उनके मन में बच्ची के प्रति गहरा लगाव पैदा हो गया।
मां को देखते ही दौड़कर लगी गले
पुलिस द्वारा जब बच्ची के परिजनों का पता लगाया गया और उसे उसकी मां के सामने लाया गया तो भावुक दृश्य देखने को मिला। बच्ची ने मां को देखते ही खुशी से मुस्कुराते हुए उन्हें गले लगा लिया। मां-बेटी के इस मिलन ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।
कॉन्स्टेबल मंदाकिनी की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “बच्ची में मुझे अपनी बेटी दिखी। हमने सोचा था कि अगर इसका कोई नहीं होगा तो मैं इसे पालूंगी।”
पुलिस की संवेदनशीलता की हो रही सराहना
इस घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी की संवेदनशीलता और समर्पण की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है। लोग उनकी मानवीय सोच और बच्ची के प्रति दिखाए गए स्नेह की सराहना कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने का काम ही नहीं करती, बल्कि कई बार जरूरतमंदों के लिए परिवार की तरह भी खड़ी नजर आती है।
