जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में अनोखी सफलता हासिल की। गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल की गंभीर बीमारी SVT का इलाज कर उसकी धड़कन को सामान्य किया गया, जिससे गर्भावस्था सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकी।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने गर्भ में पल रहे एक बच्चे के दिल की गंभीर बीमारी का इलाज कर उसकी धड़कन को सामान्य करने में सफलता पाई। यह उपचार गर्भावस्था के दौरान ही किया गया, जिससे बच्चे और मां दोनों की जान सुरक्षित रह सकी।
डॉक्टरों के अनुसार, गर्भ में पल रहे बच्चे को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) नामक गंभीर हृदय रोग था। इस स्थिति में हृदय की धड़कन सामान्य से काफी अधिक तेज हो जाती है, जिससे भ्रूण के जीवन को खतरा हो सकता है।
जांच में सामने आई गंभीर बीमारी
फीटल एवं पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने बताया कि नियमित जांच के दौरान भ्रूण की असामान्य हृदय गति का पता चला। विस्तृत परीक्षण के बाद पुष्टि हुई कि बच्चे को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) की समस्या है।
यह बीमारी गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि लगातार तेज धड़कन से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मां के जरिए पहुंचाई गई दवा
डॉक्टरों ने बच्चे तक दवा पहुंचाने के लिए गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल टेकी एरिथमिया थेरेपी दी। इस प्रक्रिया में मां को दी गई दवा प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचती है और उसके हृदय की असामान्य धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करती है।
डॉ. प्रेरणा भट के अनुसार, उपचार शुरू होने के मात्र 72 घंटे के भीतर भ्रूण की हृदय गति सामान्य स्तर पर आ गई, जिससे गर्भावस्था सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकी।
10 सप्ताह तक स्थिति रही स्थिर
इलाज के बाद करीब 10 सप्ताह तक भ्रूण की स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी रही। डॉक्टर लगातार निगरानी करते रहे और मां व बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी गई।
हालांकि गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में बच्चे में फिर से हृदय गति से जुड़ी समस्या दिखाई देने लगी, जिसके बाद विशेषज्ञों ने सुरक्षित डिलीवरी कराने का फैसला लिया।
जन्म के बाद भी जारी रहा उपचार
डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के बाद भी नवजात में करीब 48 घंटे तक टेकी एरिथमिया की स्थिति बनी रही। विशेषज्ञों की निगरानी और आवश्यक उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार आया।
अस्पताल प्रबंधन ने इसे फीटल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही उपचार के कारण बच्चे का जीवन सुरक्षित रखा जा सका।
चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि
विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्भ में पल रहे बच्चे के हृदय रोग का सफल इलाज अत्यंत जटिल प्रक्रिया होती है। ऐसे मामलों में अनुभवी डॉक्टरों, आधुनिक तकनीक और लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है।
महात्मा गांधी मेडिकल हॉस्पिटल की इस सफलता को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे कई गंभीर मामलों के इलाज के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
