ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को बड़ा झटका, सागर धनखड़ हत्याकांड में दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी.

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को सागर धनखड़ हत्या मामले में बड़ा झटका लगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने मामले की गंभीरता, गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका और मुकदमे की प्रक्रिया पर संभावित असर समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इनकार किया.
यह मामला जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियन रहे सागर धनखड़ की 2021 में हुई हत्या से जुड़ा है. सुशील कुमार इस मामले में आरोपी हैं और मई 2021 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी.
कोर्ट ने जमानत देने से क्यों किया इनकार?
दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करते हुए मामले की परिस्थितियों को गंभीर माना. अदालत के सामने यह भी महत्वपूर्ण रहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को लेकर चिंता जता चुका है.
अदालत ने माना कि आरोपी की सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभाव को देखते हुए गवाहों पर असर पड़ने की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मुकदमे की कार्यवाही अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण सबूतों की अदालत में जांच होना बाकी है.
सागर धनखड़ हत्याकांड क्या है?
यह मामला मई 2021 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है. घटना में पहलवान सागर धनखड़ की मौत हो गई थी. जांच के दौरान पुलिस ने सुशील कुमार समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. पुलिस का आरोप रहा है कि घटना में सुशील कुमार की भूमिका थी. हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी.
हथियार और वीडियो समेत कई सबूतों का जिक्र
जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने हथियार की बरामदगी और वीडियो से जुड़े सबूतों का भी उल्लेख किया गया.
अदालत ने माना कि मामले में मौजूद कई साक्ष्यों की अभी मुकदमे के दौरान विस्तार से जांच होनी बाकी है. ऐसे में इस चरण पर जमानत देते समय मुकदमे और गवाहों पर संभावित प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी अहम वजह
सुशील कुमार की जमानत याचिका पर फैसला करते समय गवाहों को प्रभावित करने की आशंका एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही.
अदालत ने पहले की न्यायिक टिप्पणियों का भी संदर्भ लिया, जिनमें यह चिंता व्यक्त की गई थी कि सुशील कुमार के प्रभाव के कारण गवाहों पर दबाव पड़ सकता है. कोर्ट ने यह भी देखा कि पिछली रिहाई के दौरान गवाहों के अपने बयानों से पीछे हटने को लेकर चिंता जताई गई थी.
सुप्रीम कोर्ट पहले भी रद्द कर चुका है जमानत
इस मामले में सुशील कुमार को पहले भी अदालत से राहत मिली थी. लेकिन बाद में उनकी जमानत को चुनौती दी गई.
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में हाई कोर्ट के जमानत संबंधी आदेश को रद्द करते हुए गवाहों पर संभावित प्रभाव और मुकदमे में देरी की आशंका जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया था.
इसके बाद एक बार फिर जमानत की मांग की गई, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने अब राहत देने से इनकार कर दिया.
2023 में मिली थी अंतरिम जमानत
सुशील कुमार को जुलाई 2023 में सत्र अदालत ने घुटने की सर्जरी के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी. यह राहत केवल चिकित्सा उपचार के उद्देश्य से दी गई थी. इसके बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी रही. बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर उनकी नियमित जमानत को लेकर कानूनी लड़ाई चली.
पुलिस और सागर के पिता ने किया जमानत का विरोध
सुशील कुमार की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस और मृतक सागर धनखड़ के पिता की ओर से विरोध किया गया. दलील दी गई कि आरोपी को जमानत मिलने पर गवाहों और मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो सकती है. अदालत ने इन चिंताओं को भी अपने फैसले में महत्व दिया.
कोर्ट ने कहा- जमानत नियम, जेल अपवाद, लेकिन…
आम तौर पर आपराधिक मामलों में अदालतें इस सिद्धांत को ध्यान में रखती हैं कि जमानत नियम है और जेल अपवाद. लेकिन जमानत पर फैसला लेते समय अपराध की प्रकृति, सबूत, आरोपी के प्रभाव, गवाहों की सुरक्षा और मुकदमे को प्रभावित करने की संभावना जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाता है.
इस मामले में अदालत ने अपराध की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं माना.
सुशील कुमार का शानदार रहा है क्रिकेट नहीं, कुश्ती करियर
सुशील कुमार भारत के सबसे सफल पहलवानों में शामिल रहे हैं. उन्होंने ओलंपिक में भारत के लिए दो व्यक्तिगत पदक जीते. 2008 बीजिंग ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था. इसके बाद 2012 लंदन ओलंपिक में उन्होंने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा. वह दो अलग-अलग ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले भारत के शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं. उनकी उपलब्धियों के कारण भारतीय कुश्ती में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता रहा है.
जमानत खारिज होने का मतलब क्या है?
यह समझना जरूरी है कि किसी आरोपी की जमानत याचिका खारिज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है. जमानत पर फैसला यह तय नहीं करता कि आरोपी अपराध का दोषी है या नहीं. अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत करेगी. इस मामले में भी सुशील कुमार के खिलाफ आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी बाकी है.
