BJP-RSS से माफी नहीं मांगूंगा', राहुल गांधी का बड़ा बयान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह BJP और RSS से माफी नहीं मांगेंगे, क्योंकि उनका मानना है कि उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी कई गंभीर आरोप लगाए और छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की।
“मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया”
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से कई बार अपनी बात रखने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। उनका कहना था कि वह संसद में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया।
“BJP-RSS से माफी नहीं मांगूंगा”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें यह संदेश दिया गया था कि यदि वह माफी मांग लें, तो उन्हें सदन में बोलने की अनुमति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि वह BJP और RSS से माफी नहीं मांगेंगे और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाना विपक्ष के नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक घायल छात्र से जुड़े मेडिकल दस्तावेज़ देखे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
अमित शाह पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई हुई है, तो उसकी जवाबदेही गृह मंत्रालय की बनती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच कराने और जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई की मांग की।
पेपर लीक कानून पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने संसद में पारित पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि जब तक मौजूदा मामलों में दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक नए कानून का उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं होगा।
