नागांव लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस का बड़ा दांव! 🗳️ सिबामोनी बोरा को मिला टिकट, 6 अक्टूबर को होगा मतदान। जानिए पूरी कहानी।

असम की नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा को 9-नागांव लोकसभा सीट से मैदान में उतारने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनकी उम्मीदवारी को मंजूरी दी है। कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के हस्ताक्षर वाली घोषणा में सिबामोनी बोरा के नाम को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी गई है।
6 अक्टूबर को होगा नागांव लोकसभा उपचुनाव…..
निर्वाचन आयोग ने 7 सितंबर को उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। असम की नागांव लोकसभा सीट के अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव होने हैं। नागांव लोकसभा सीट के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।
प्रद्युत बारदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट…..
नागांव लोकसभा सीट कांग्रेस नेता प्रद्युत बारदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की थी। स्रोत के मुताबिक, बाद में प्रद्युत बारदोलोई बीजेपी में शामिल हो गए और हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी।
कौन हैं सिबामोनी बोरा…..?
सिबामोनी बोरा कांग्रेस की नेता और पूर्व विधायक हैं। उन्होंने 2021 के असम विधानसभा चुनाव में बटाद्रोबा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। उस चुनाव में उन्होंने बीजेपी की तत्कालीन विधायक अंगूरलता डेका को 32,820 वोटों के अंतर से हराया था। सिबामोनी बोरा को चुनाव में 84,278 वोट मिले थे।
पूर्व मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा से भी है रिश्ता…..
सिबामोनी बोरा का राजनीतिक और पारिवारिक संबंध असम की राजनीति से भी जुड़ा रहा है। वह पूर्व विधायक किरण बोरा की बेटी हैं और असम के पूर्व मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा की बहू रह चुकी हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने 1980 में नौगोंग कॉलेज से BSc और 1982 में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से MSc की पढ़ाई की है।
नागांव में कांग्रेस के सामने होगी चुनौती…..
अब सिबामोनी बोरा के सामने नागांव लोकसभा सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती होगी। उपचुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरेंगे। 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद यह साफ होगा कि नागांव की जनता किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला सुनाती है।
