BRICS Summit के लिए दिल्ली अभेद्य किले में तब्दील! 🚨 एंटी-ड्रोन सिस्टम से स्नाइपर तक, चप्पे-चप्पे पर नजर।

राजधानी दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। दुनिया के कई बड़े नेताओं के दिल्ली पहुंचने के मद्देनजर सुरक्षा का ऐसा मल्टी-लेयर सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी रखी जाएगी। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित होना है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई प्रमुख नेताओं के पहुंचने की उम्मीद है।
दिल्ली में सुरक्षा की कई परतें तैयार…..
BRICS जैसे हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा सिर्फ कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहती। एयरपोर्ट, विदेशी मेहमानों के होटल, उनके आने-जाने वाले रास्तों और सम्मेलन स्थल तक सुरक्षा का अलग-अलग स्तरों वाला नेटवर्क तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां प्रमुख रूट और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही हैं। दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और दूसरी एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।
आसमान में भी नजर, एक्टिवेट किए गए काउंटर-ड्रोन सिस्टम…..
BRICS सम्मेलन के दौरान ड्रोन या किसी अन्य अनधिकृत उड़ने वाली वस्तु से संभावित खतरे को देखते हुए काउंटर-ड्रोन सिस्टम सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक ‘सॉफ्ट-किल’ और ‘हार्ड-किल’ क्षमता वाले काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल किए जाएंगे। DRDO की ओर से विकसित सिस्टम भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होंगे। इसका मकसद सम्मेलन स्थल और VVIP रूट के आसपास किसी संदिग्ध ड्रोन गतिविधि का समय रहते पता लगाना और जरूरत पड़ने पर उसे निष्क्रिय करना है।
इमारतों से लेकर संवेदनशील इलाकों तक निगरानी…..
हाई-प्रोफाइल विदेशी मेहमानों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास की ऊंची इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी का उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे को सम्मेलन स्थल तक पहुंचने से पहले ही रोकना है। सुरक्षा एजेंसियां ऑपरेशनल कारणों से तैनाती की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करती हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था के कई हिस्सों की जानकारी सीमित रखी जा रही है।
NSG ने किया ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’…..
BRICS सम्मेलन से पहले NSG ने ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ के तहत दिल्ली में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल की है। इस अभ्यास में आतंकवादी हमले, बंधक संकट और रेस्क्यू जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखा गया। करीब 100 कमांडो की इस कवायद में दिल्ली पुलिस की SWAT टीम भी शामिल रही। हेलीकॉप्टर से कमांडो उतारने यानी स्लिदरिंग जैसी तकनीक का भी अभ्यास किया गया। इस तरह की ड्रिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी आपात स्थिति में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियां बिना देरी के एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर कार्रवाई कर सकें।
एयरपोर्ट से भारत मंडपम तक हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर…..
विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए एयरपोर्ट से उनके होटल और फिर भारत मंडपम तक जाने वाले रूट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। करीब 10 होटल विदेशी मेहमानों और डेलिगेशन से जुड़े बताए गए हैं। VVIP काफिलों की आवाजाही के लिए रिहर्सल की गई है और कई जगह ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। काफिले की गाड़ियों की रियल-टाइम निगरानी के लिए GPS व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
4,800 ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती…..
VVIP मूवमेंट के कारण दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था भी बड़ी चुनौती है। रिपोर्ट के मुताबिक सम्मेलन के दौरान करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा और जरूरत के अनुसार डायवर्जन लागू किए जाएंगे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से यात्रा की पहले से योजना बनाने और अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी है।
सुरक्षा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं…..
BRICS सम्मेलन में शामिल होने वाले VVIP मेहमानों की सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली के साथ NCR क्षेत्र में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद पुलिस के बीच समन्वय बैठकें की गई हैं। ड्रोन निगरानी, होटलों की जांच और सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग जैसे कदमों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
क्यों इतनी अहम है BRICS की सुरक्षा….?
BRICS दुनिया के प्रमुख उभरते देशों का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। भारत इस साल संगठन की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन देश के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। रूस, चीन समेत कई प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी के कारण सम्मेलन की सुरक्षा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
जमीन से आसमान तक सुरक्षा का घेरा….
BRICS Summit 2026 के लिए दिल्ली में तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। एक तरफ भारत मंडपम में वैश्विक नेताओं की बैठक होगी, तो दूसरी तरफ राजधानी में जमीन, सड़क और एयरस्पेस—तीनों स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। काउंटर-ड्रोन सिस्टम, VVIP रूट की निगरानी, NSG की मॉक ड्रिल, ट्रैफिक कंट्रोल और मल्टी-एजेंसी इंटेलिजेंस नेटवर्क मिलकर इस पूरे सुरक्षा कवच का हिस्सा हैं। सम्मेलन के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी कोशिश यही होगी कि मेहमानों की आवाजाही सुरक्षित रहे और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
