📦 डायपर की कीमत सिर्फ ₹1,429, लेकिन डिलीवरी में लापरवाही कूरियर कंपनी को पड़ी भारी! केरल की उपभोक्ता अदालत ने पिता को ₹22,500 मुआवजा देने का आदेश दिया। जानिए पूरा मामला।

केरल में उपभोक्ता अदालत का बड़ा फैसला, पिता को मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए मिला मुआवजा….
ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में सामान ऑर्डर करना जितना आसान हो गया है, उसकी समय पर डिलीवरी उतनी ही जरूरी हो गई है। लेकिन अगर जरूरी सामान समय पर पहुंचे ही नहीं और कंपनी शिकायत के बावजूद लापरवाही बरते, तो ग्राहक के पास कानूनी रास्ता भी मौजूद है। केरल से सामने आया एक मामला इसी बात की मिसाल है, जहां बच्ची के लिए मंगाए गए डायपर की डिलीवरी नहीं होने पर उपभोक्ता अदालत ने कूरियर कंपनी को 22,500 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
1,429 रुपये के डायपर का था ऑर्डर…..
मामला मार्च 2025 का बताया जा रहा है। केरल के एक व्यक्ति ने अपनी छोटी बच्ची के लिए करीब 1,429 रुपये के डायपर ऑनलाइन ऑर्डर किए थे। ऑर्डर बुक होने के बाद सामान कूरियर कंपनी को सौंप भी दिया गया था। बताया गया कि पार्सल डिलीवरी हब तक पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद ग्राहक तक सामान नहीं पहुंचा। डिलीवरी की तारीख लगातार आगे बढ़ती रही और परिवार को जरूरी सामान के लिए परेशानी उठानी पड़ी।
परेशान होकर उपभोक्ता अदालत पहुंचे पिता…..
जब काफी इंतजार के बाद भी डायपर की डिलीवरी नहीं हुई, तो पिता ने मामले को उपभोक्ता फोरम के सामने रखा। उनका आरोप था कि कूरियर कंपनी ने सेवा देने में लापरवाही बरती और जरूरी सामान समय पर उपलब्ध नहीं कराया। मामले की सुनवाई पत्तनमथिट्टा जिला कंज्यूमर कमीशन में हुई। आयोग ने मामले में कूरियर कंपनी की सेवा को लेकर गंभीरता दिखाई और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया।
कंपनी को देने होंगे 22,500 रुपये :-
उपभोक्ता आयोग ने कूरियर कंपनी को कुल 22,500 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसमें—
- 15,000 रुपये मानसिक परेशानी, असुविधा और बच्ची के लिए जरूरी सामान समय पर नहीं मिलने के मुआवजे के तौर पर।
- 7,500 रुपये कानूनी कार्रवाई में हुए खर्च की भरपाई के लिए।
इसके अलावा, अगर डायपर की 1,429 रुपये की कीमत ग्राहक से पहले ही वसूली जा चुकी थी, तो उसे 9 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का भी निर्देश दिया गया।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं, कूरियर कंपनी की गलती…..
इस मामले में आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं माना गया। सामान कूरियर कंपनी को सौंपे जाने के बाद उसकी डिलीवरी नहीं होना मुख्य रूप से कूरियर सेवा की लापरवाही मानी गई। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए भी अहम है, जिन्हें ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी में लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है। मामला यह संदेश देता है कि ग्राहक को सिर्फ सामान की कीमत ही नहीं, बल्कि सेवा में गंभीर कमी होने पर मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए भी राहत मिल सकती है।
ग्राहकों के लिए क्या सीख….?
अगर कोई ऑनलाइन ऑर्डर समय पर डिलीवर नहीं होता है, तो ग्राहक को ऑर्डर की रसीद, भुगतान का प्रमाण, ट्रैकिंग डिटेल और कंपनी से हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखने चाहिए। समस्या का समाधान नहीं होने पर उपभोक्ता शिकायत का रास्ता अपनाया जा सकता है। यह मामला सिर्फ 1,429 रुपये के डायपर का नहीं, बल्कि ग्राहक के अधिकार और कंपनियों की जवाबदेही का भी है।
