MP में नकली IAS-IPS का खेल! सरकारी नौकरी और टेंडर दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की कथित ठगी के कई मामले सामने आए हैं।

मध्य प्रदेश में इन दिनों एक अलग तरह का फर्जीवाड़ा पुलिस के सामने चुनौती बनकर उभरा है। मामला उन लोगों का है जो खुद को IAS, IPS या किसी बड़े सरकारी पद पर तैनात अधिकारी बताकर लोगों के बीच रौब जमाते हैं और फिर इसी पहचान का इस्तेमाल ठगी के लिए करते हैं। पुलिस के सामने पिछले करीब एक महीने में ऐसे कई मामले आए हैं। कहीं सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए तो कहीं टेंडर और सरकारी विभाग में काम दिलाने का भरोसा देकर लोगों को कथित तौर पर अपने जाल में फंसाया गया।
अफसर जैसी लाइफस्टाइल से बनाते थे भरोसा
फर्जी अधिकारी बनने वाले कथित आरोपियों का सबसे बड़ा हथियार उनका दिखावा बताया जा रहा है। महंगी गाड़ियों से चलना, महंगे मोबाइल रखना, सरकारी दस्तावेज जैसे दिखने वाले लेटरहेड और पहचान पत्र रखना और लोगों से बेहद आत्मविश्वास के साथ बात करना—इन तरीकों से वे खुद को असली अधिकारी साबित करने की कोशिश करते थे।
अशोकनगर से जुड़े मामले में पुलिस के अनुसार तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु पर लोगों को सरकारी नौकरी और टेंडर दिलाने का झांसा देकर पैसे लेने के आरोप हैं। पुलिस को कथित तौर पर एक ऐसी इनोवा भी मिली, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा हुआ था। इसके अलावा फर्जी CBI कार्ड, लेटरहेड और महंगे आईफोन मिलने की बात भी सामने आई है। तृप्ति खुद को एमपी टूरिज्म में एडिशनल हेड बताकर लोगों से मुलाकात करती थी।
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के मुताबिक, तृप्ति राजपूत ने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए कुछ युवाओं को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
इसके बदले कथित तौर पर लाखों रुपये लिए गए। पीड़ितों को व्हाट्सऐप के जरिए जॉइनिंग लेटर भी भेजे गए। बाद में इन दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठे और मामला पुलिस तक पहुंचा।
जांच आगे बढ़ी तो तृप्ति और उसके भाई के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों की जानकारी सामने आई। बताया गया है कि दोनों के खिलाफ अशोकनगर के चंदेरी और भोपाल के बागसेवनिया में मामले दर्ज किए गए हैं।
विधानसभा परिसर से जुड़े वीडियो ने भी खींचा ध्यान
इस मामले में एक कथित वीडियो भी सामने आया, जिसमें तृप्ति दो अन्य महिलाओं के साथ दिखाई देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें विशाखा तिरकम और ख्याति ढोलपुरे के नाम सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि इन महिलाओं को भी IAS बनाने का झांसा दिए जाने का आरोप है। इस पूरे मामले की जांच पुलिस कर रही है और सामने आए दावों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
2021 से नेटवर्क चलने का दावा
सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है कि कथित फर्जी अधिकारियों का यह नेटवर्क वर्ष 2021 से सक्रिय था। हालांकि, नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और कितने लोगों से ठगी की गई, इसका पूरा खुलासा जांच आगे बढ़ने के बाद ही हो सकेगा।
इस मामले ने एक अहम सवाल भी खड़ा किया है—अगर कोई व्यक्ति खुद को IAS या IPS अधिकारी बताता है, तो आखिर उसकी पहचान की जांच कैसे की जाए?
फर्जी IPS ऋषि कुमार यादव पर भी गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश में फर्जी अधिकारी बनकर ठगी के आरोप का एक और मामला ऋषि कुमार यादव से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स विभाग में जॉइंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताता था। आरोप है कि उसने UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं को इनकम टैक्स विभाग में नौकरी दिलाने का लालच दिया और कई लोगों से पैसे लिए। शिकायतों के मुताबिक, करीब एक दर्जन युवाओं से कुल लगभग 8 लाख रुपये की ठगी की गई।
मामले में कथित फर्जी जॉइनिंग लेटर भी सामने आया। उसमें मौजूद स्पेलिंग की गलतियों ने पीड़ितों को शक करने का मौका दिया और इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
इंदौर में भी सामने आया फर्जी IAS का मामला
फर्जी अधिकारियों का मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। इंदौर में पुलिस ने राज सोनी उर्फ हिमांशु पांचाल को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि हिमांशु खुद को IAS अधिकारी बताता था। यहां तक कि उसके घर के बाहर भी ‘IAS राज सोनी’ के नाम की नेम प्लेट लगी होने की बात कही गई। बताया जाता है कि एक होटल में खाना खाने के दौरान उसके अधिकारी होने के दावे और व्यवहार पर होटल कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच के दौरान कथित फर्जी पहचान का मामला सामने आया।
आखिर फर्जी अधिकारी बनना इतना आसान कैसे?
फर्जी IAS-IPS मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि आम लोग अक्सर सरकारी पद और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। आरोपी इसी भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। किसी भी व्यक्ति के खुद को IAS या IPS बताने मात्र से उस पर विश्वास करना जोखिम भरा हो सकता है। सरकारी नौकरी, टेंडर, विभागीय नियुक्ति या किसी सरकारी काम के बदले निजी खाते में पैसे मांगना भी बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है।
Disclaimer: इस लेख में लगाए गए आरोप संबंधित शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोपियों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।
