Gen Z ने बदला शराब का बाजार! कम पी रहे हैं युवा, लेकिन क्वालिटी और प्रीमियम ब्रांड्स पर खर्च करने से नहीं कर रहे परहेज।

शराब के बाजार में युवाओं की पसंद तेजी से बदल रही है. खासकर Gen Z की आदतों में आए बदलाव ने शराब कंपनियों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है. जहां एक ओर युवा पहले की तुलना में शराब का सेवन कम करने की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जब वे शराब खरीदते हैं तो सस्ती बोतल के बजाय बेहतर क्वालिटी और प्रीमियम विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं. इस बदलाव का असर शराब के कारोबार पर भी देखने को मिल रहा है. कम मात्रा में खपत के बावजूद प्रीमियम सेगमेंट की मांग बढ़ने से कंपनियों के लिए कम वॉल्यूम में भी बेहतर कमाई की संभावना बन रही है.
Gen Z शराब से क्यों बना रही दूरी….?
Gen Z के शराब कम पीने के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं. इनमें स्वास्थ्य, फिटनेस और बजट जैसे पहलू प्रमुख हैं. युवा अपनी लाइफस्टाइल को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हैं और कई लोग शराब का सेवन सीमित कर रहे हैं. इसका यह मतलब नहीं है कि पूरी Gen Z ने शराब को पूरी तरह छोड़ दिया है. कई युवा कभी-कभार और कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं. यही बदलाव शराब के बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.
सस्ती शराब से ज्यादा क्वालिटी पर ध्यान….
युवा उपभोक्ताओं की पसंद में एक बड़ा बदलाव यह है कि वे केवल कम कीमत देखकर शराब खरीदने के इच्छुक नहीं हैं. उनके लिए प्रोडक्ट की क्वालिटी, स्वाद और ब्रांड की पहचान भी महत्वपूर्ण हो गई है. यानी अगर कोई युवा शराब खरीदता है तो वह अपनी पसंद के मुताबिक बेहतर उत्पाद पर अधिक पैसा खर्च करने के लिए तैयार हो सकता है. इसी वजह से प्रीमियम और हाई-एंड अल्कोहल सेगमेंट को फायदा मिलने की बात सामने आ रही है.
अलग फ्लेवर और नए अनुभव की मांग….
Gen Z के बीच नए और अलग स्वाद वाले प्रोडक्ट्स की मांग भी बढ़ती दिखाई दे रही है. खासकर फ्लेवर्ड ड्रिंक्स और अलग-अलग वैरायटी के प्रोडक्ट युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं. वोदका के अलग-अलग फ्लेवर इसका एक उदाहरण हैं. युवा सिर्फ शराब पीने के बजाय नए टेस्ट और अनुभव को भी महत्व दे रहे हैं. कंपनियां इसी बदलती पसंद को ध्यान में रखकर नए प्रोडक्ट और प्रीमियम वैरायटी बाजार में उतार रही हैं.
कम सेवन के बावजूद कंपनियों को कैसे फायदा….?
पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि अगर युवा कम शराब पी रहे हैं तो शराब कंपनियों के कारोबार पर इसका नकारात्मक असर होना चाहिए. लेकिन प्रीमियमाइजेशन ने इस समीकरण को बदल दिया है. अगर कोई उपभोक्ता कम मात्रा में शराब खरीदता है लेकिन बेहतर और महंगा प्रोडक्ट चुनता है, तो कंपनियों को प्रति यूनिट ज्यादा कमाई हो सकती है. यही वजह है कि शराब बाजार में मात्रा के बजाय वैल्यू ग्रोथ पर भी ध्यान बढ़ रहा है.
इन कंपनियों को मिल रहा फायदा….
युवाओं की बदलती पसंद का फायदा प्रीमियम और अलग-अलग कैटेगरी में मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियों को मिल सकता है. रैडिको खेतान, यूनाइटेड स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां शराब बाजार में प्रमुख नाम हैं और प्रीमियम सेगमेंट की बढ़ती मांग उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
शराब बाजार के लिए क्या है नया ट्रेंड….?
Gen Z का बदलता व्यवहार शराब कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संकेत है. आने वाले समय में सिर्फ कम कीमत वाले प्रोडक्ट बेचने के बजाय कंपनियों को क्वालिटी, फ्लेवर, ब्रांड वैल्यू और नए अनुभव पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है. यानी शराब बाजार में युवा पीढ़ी की पसंद का फोकस ‘ज्यादा पीना’ से ‘कम लेकिन बेहतर चुनना’ की तरफ जाता दिखाई दे रहा है. यही ट्रेंड आने वाले वर्षों में प्रीमियम अल्कोहल मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है…..
