मोहम्मद यूनुस की बढ़ी मुश्किलें! धानमंडी-32 मामले में 27 के खिलाफ कोर्ट में शिकायत।

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर मोहम्मद यूनुस का नाम विवादों में है। ढाका के धानमंडी-32 स्थित शेख मुजीबुर रहमान के आवास और स्मारक परिसर में हुई तोड़फोड़, आगजनी और विध्वंस को लेकर यूनुस समेत 27 लोगों के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, यह आरोप हैं और शिकायत में लगाए गए दावों की अभी न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच होनी बाकी है।
धानमंडी-32 की घटना 5 फरवरी 2025 की रात हुई थी। उस समय बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे थे। परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी के बाद भारी मशीनों की मदद से इमारत के कुछ हिस्सों को गिराया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अगले दिन भी इमारत को तोड़ने का काम जारी रहा।
मोहम्मद यूनुस समेत 27 लोगों के खिलाफ शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत में मोहम्मद यूनुस के साथ पूर्व कानून सलाहकार डॉ. आसिफ नजरुल समेत कई पूर्व अंतरिम सरकार के अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धानमंडी-32 में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के पीछे आरोपियों की भूमिका या समर्थन था। हालांकि, इन आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है। यह भी महत्वपूर्ण है कि घटना के तत्काल बाद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने धानमंडी-32 में हुई तोड़फोड़ को “अनपेक्षित और अवांछित” बताया था। सरकार के प्रेस विंग ने घटना को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों के बाद पैदा हुए जनाक्रोश से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी थी।
धानमंडी-32 में उस रात क्या हुआ था?
5 फरवरी 2025 की शाम धानमंडी-32 में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। इससे पहले सोशल मीडिया पर एक कार्यक्रम के जरिए लोगों को वहां इकट्ठा होने की अपील की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, रात करीब 9:30 बजे इमारत में आग लगा दी गई। इसके बाद देर रात क्रेन और एक्सकेवेटर मौके पर पहुंचे और इमारत के हिस्सों को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। अगले दिन भी प्रदर्शनकारियों ने हथौड़ों और अन्य उपकरणों से ढांचे को तोड़ना जारी रखा।
घटना के दौरान मुख्य भवन के साथ आसपास के कुछ ढांचों को भी नुकसान पहुंचा। इनमें एक आर्ट गैलरी और बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान के स्मारक संग्रहालय से जुड़ा परिसर भी शामिल था।
सरकार ने घटना पर क्या कहा था?
घटना के बाद अंतरिम सरकार के प्रेस विंग ने कहा था कि धानमंडी-32 में हुई तोड़फोड़ की घटना अवांछित थी। सरकार ने यह भी कहा था कि देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय सरकार ने सार्वजनिक तौर पर घटना को अपनी नीति या आधिकारिक कार्रवाई के तौर पर पेश नहीं किया था।
CID ने भी जुटाए थे सबूत
घटना के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की टीम ने धानमंडी-32 पहुंचकर घटनास्थल से सबूत जुटाए थे।रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सदस्यीय CID टीम ने मौके का निरीक्षण किया और विभिन्न प्रकार के साक्ष्य एकत्र किए। अधिकारियों ने कहा था कि इन सबूतों का विश्लेषण करने के बाद ही उनके बारे में निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
धानमंडी-32 को लेकर फैली थी कई तरह की अफवाहें
घटना के बाद धानमंडी-32 के आसपास बने एक अन्य भवन के बेसमेंट को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी किए गए थे। कुछ लोगों ने इसे कथित गुप्त हिरासत केंद्र से जोड़ना शुरू कर दिया था। बाद में फायर सर्विस ने बेसमेंट से पानी निकालकर जांच की। अधिकारियों के अनुसार वहां कोई गुप्त संरचना नहीं मिली और वह हिस्सा एक एलिवेटर शाफ्ट के लिए बनाया गया था। इससे यह भी सामने आया कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई अपुष्ट दावे तेजी से फैल रहे थे।
बांग्लादेश की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
धानमंडी-32 सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि बांग्लादेश के इतिहास और राजनीति से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसलिए इसके विध्वंस ने देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज किया था। मानवाधिकार और नागरिक संगठनों ने भी घटना पर चिंता जताई थी। Transparency International Bangladesh और BLAST ने धानमंडी-32 समेत हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया था।
मोहम्मद यूनुस और भारत-बांग्लादेश संबंध
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला। दोनों देशों के बीच राजनीतिक बयानबाजी, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीति जैसे विषयों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।
