अंडे, चिकन और मछली खाने वालों को बड़ा झटका! 🥚🍗 बढ़ती महंगाई से नॉन-वेज हुआ महंगा, जानिए कब मिल सकती है राहत।

नई दिल्ली: अगर आप नियमित रूप से अंडे, चिकन, मछली या अन्य नॉन-वेज खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो आपकी रसोई का बजट बढ़ सकता है। जून 2026 के महंगाई आंकड़ों के अनुसार, प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती पोल्ट्री फीड लागत, उत्पादन खर्च और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण फिलहाल कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
किन खाद्य पदार्थों की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ीं?
जून महीने के आंकड़ों के मुताबिक प्रोटीन श्रेणी के कई उत्पाद महंगे हुए हैं।
- अंडों की कीमतों में 3.71% की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- गोमांस और भैंस के मांस के दाम 3.41% बढ़े।
- मछली और झींगा की कीमतों में 2.90% की वृद्धि हुई।
- चिकन, मटन और अन्य मांसाहारी उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला।
- मांस, मछली और अंडे की श्रेणी में कुल महंगाई दर 8.79% तक पहुंच गई।
सालाना आधार पर भी महंगाई बनी ऊंची
पिछले वर्ष की तुलना में भी नॉन-वेज खाद्य पदार्थों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- गोमांस और भैंस के मांस की महंगाई: 12.3%
- चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी: 10.83%
- मछली और झींगा: 7.7%
- बकरी और भेड़ के मांस की महंगाई: 7.25%
- अंडों की सालाना महंगाई: 6.45%
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
- पोल्ट्री फीड (मुर्गी दाना) की लागत लगातार ऊंची बनी हुई है।
- उत्पादन, परिवहन और वितरण का खर्च बढ़ा है।
- प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की मांग लगातार बनी हुई है।
- सप्लाई चेन पर लागत का दबाव भी कीमतों को प्रभावित कर रहा है।
क्या आने वाले दिनों में मिलेगी राहत?
फिलहाल अगले कुछ सप्ताह में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि श्रावण माह और कुछ प्रमुख त्योहारों के दौरान कई लोग नॉन-वेज खाने से परहेज करते हैं। यदि मांग में कमी आती है, तो बाजार में कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पोल्ट्री फीड और उत्पादन लागत में कमी नहीं आती, तब तक अंडे, चिकन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना सीमित रहेगी।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
महंगाई के दौर में उपभोक्ता अपने भोजन की बेहतर योजना बनाकर खर्च को नियंत्रित कर सकते हैं। स्थानीय बाजारों में कीमतों की तुलना करना, ऑफर का लाभ उठाना और जरूरत के अनुसार खरीदारी करना बजट पर पड़ने वाले असर को कम कर सकता है।
