अनशन खत्म करते समय नारियल पानी, शहद या जूस क्यों दिया जाता है? जानिए मेडिकल वजह

लंबे समय से भूख हड़ताल या अनशन पर बैठे किसी व्यक्ति का व्रत तुड़वाने के लिए अक्सर नारियल पानी, शहद मिला पानी, फलों का जूस या अन्य हल्के तरल पदार्थ ही दिए जाते हैं। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे अनशन के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि आखिर सीधे रोटी, चावल या भारी भोजन क्यों नहीं कराया जाता।
लंबे अनशन के बाद नारियल पानी, शहद मिला पानी या फलों का जूस देना केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित तरीका है। इससे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती है, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन सुधरता है और रिफीडिंग सिंड्रोम जैसी गंभीर समस्या से बचाव होता है। यही कारण है कि डॉक्टर भी लंबे उपवास के बाद सीधे भारी भोजन कराने के बजाय हल्के तरल पदार्थों से शुरुआत करने की सलाह देते हैं।
सोनम वांगचुक के मामले में क्यों बढ़ी चर्चा?
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय से अनशन पर हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। यदि उनका अनशन समाप्त कराया जाता है, तो मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत शुरुआत हल्के तरल पदार्थों से ही की जाएगी और उसके बाद धीरे-धीरे सामान्य भोजन शुरू कराया जाएगा।
लंबे अनशन के बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
जब कोई व्यक्ति कई दिनों तक भोजन नहीं करता, तो शरीर पहले ग्लूकोज का उपयोग करता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए शरीर वसा और अंत में मांसपेशियों का इस्तेमाल करने लगता है। इस दौरान—
- पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है।
- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है।
- ब्लड शुगर का स्तर गिर सकता है।
- कमजोरी, चक्कर और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में शरीर को सामान्य भोजन के लिए धीरे-धीरे तैयार करना जरूरी होता है।
1. रिफीडिंग सिंड्रोम से बचाने के लिए
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे उपवास के बाद यदि व्यक्ति अचानक भारी भोजन कर ले, तो रिफीडिंग सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।
इस स्थिति में शरीर अचानक मिले पोषक तत्वों को सही तरीके से संभाल नहीं पाता, जिससे—
- उल्टी
- पेट दर्द
- सांस लेने में दिक्कत
- हृदय की धड़कन अनियमित होना
- गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है।
इसी वजह से शुरुआत हमेशा हल्के तरल पदार्थों से की जाती है।
2. नारियल पानी तुरंत देता है ऊर्जा
लंबे समय तक भूखे रहने के कारण शरीर में ग्लूकोज की मात्रा काफी कम हो जाती है।
नारियल पानी और फलों के रस में मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर को तेजी से ऊर्जा देती है। इससे—
- कमजोरी कम होती है।
- दिमाग को तुरंत ऊर्जा मिलती है।
- शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने लगता है।
3. इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करता है
अनशन के दौरान शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकती है।
नारियल पानी में पाए जाने वाले—
- पोटेशियम
- सोडियम
- मैग्नीशियम
- कैल्शियम
शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे मांसपेशियों और नसों का काम सामान्य होने लगता है।
4. पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सक्रिय करता है
कई दिनों तक भोजन न मिलने के कारण पेट और आंतों की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
इसलिए डॉक्टर पहले—
- नारियल पानी
- फलों का जूस
- शहद मिला पानी
- सूप
जैसे हल्के तरल पदार्थ देते हैं।
जब शरीर इन्हें आसानी से पचाने लगता है, तब अगले 24 से 48 घंटों में—
- दलिया
- खिचड़ी
- उबली सब्जियां
- हल्का भोजन
धीरे-धीरे शुरू कराया जाता है।
डॉक्टरों की निगरानी क्यों जरूरी होती है?
यदि किसी व्यक्ति ने कई दिनों तक अनशन किया हो, तो उसका व्रत हमेशा डॉक्टरों की निगरानी में ही तुड़वाया जाना चाहिए।
डॉक्टर इस दौरान—
- ब्लड प्रेशर
- ब्लड शुगर
- हार्ट रेट
- इलेक्ट्रोलाइट्स
- किडनी और लीवर की स्थिति
पर लगातार नजर रखते हैं, ताकि किसी भी तरह की मेडिकल जटिलता से बचा जा सके।
