दिल्ली राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में एशियाई शेरनी महागौरी ने तीन शावकों को जन्म दिया है। एक साल के भीतर दूसरी बार सफल ब्रीडिंग की यह दुर्लभ घटना वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (नेशनल जूलॉजिकल पार्क) से वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां एशियाई शेरनी महागौरी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस दुर्लभ उपलब्धि को जू के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम की बड़ी सफलता माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि महागौरी ने एक साल के भीतर दूसरी बार सफलतापूर्वक शावकों को जन्म दिया है, जिसे एशियाई शेरों की ब्रीडिंग के लिहाज से बेहद दुर्लभ घटना माना जा रहा है।
महागौरी और महेश्वर बने फिर माता-पिता
नवजात शावकों के माता-पिता दिल्ली जू में रहने वाले एशियाई शेर महागौरी और महेश्वर हैं। जू प्रशासन के अनुसार तीनों शावकों को फिलहाल उनकी मां के साथ सुरक्षित मेटरनिटी बाड़े में रखा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि शावकों के शुरुआती विकास और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें शांत और सुरक्षित वातावरण दिया जा रहा है। देखभाल करने वाली टीम लगातार सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से उनकी निगरानी कर रही है।
दूसरी बार सफल ब्रीडिंग बनी खास उपलब्धि
दिल्ली जू के निदेशक संजीत कुमार के अनुसार, महागौरी 2009 के बाद पहली ऐसी शेरनी बनी हैं जिसने बच्चों को जन्म देने के बाद एक वर्ष के भीतर दोबारा गर्भधारण कर सफलतापूर्वक शावकों को जन्म दिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई वर्षों से दिल्ली जू में एशियाई शेरों की ब्रीडिंग दर काफी कम हो गई थी। लंबे समय तक शावकों के जन्म की संख्या बेहद सीमित रही थी।
पिछले साल पांच शावकों का हुआ था जन्म
इससे पहले 27 अप्रैल 2025 को महागौरी ने पांच शावकों को जन्म दिया था। हालांकि उनमें से केवल दो शावक ही जीवित बच पाए थे, जिनका नाम कार्तिक और करणी रखा गया।
अब तीन नए शावकों के जन्म से जू प्रशासन को एशियाई शेरों की संख्या बढ़ाने और संरक्षण कार्यक्रम को मजबूत करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
एशियाई शेरों की संख्या बढ़ाने की कोशिश
दिल्ली जू में एशियाई शेरों की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में विशेष प्रयास किए गए हैं। इसी उद्देश्य से वर्ष 2021 में गुजरात के जूनागढ़ से नर शेर महेश्वर और दो मादा शेर महागौरी तथा शैलजा को दिल्ली लाया गया था। जू प्रशासन को उम्मीद थी कि इन शेरों के जरिए सफल प्रजनन कार्यक्रम चलाया जा सकेगा। हालांकि बीच में मादा शेर शैलजा के घायल होने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण योजना को कुछ झटका लगा था।
फिलहाल दिल्ली जू में कितने एशियाई शेर?
नवजात शावकों के जन्म से पहले दिल्ली जू में कुल छह एशियाई शेर मौजूद थे। इनमें तीन नर शेर सुंदरम, महेश्वर और कार्तिक शामिल हैं, जबकि तीन मादा शेर महागौरी, शैलजा और करणी हैं।
अब तीन नए शावकों के आने से जू में एशियाई शेरों की संख्या और बढ़ जाएगी, जिससे संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई शेरों की आबादी सीमित होने के कारण सफल प्रजनन कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली जू में लगातार दूसरी बार सफल ब्रीडिंग होना वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जू प्रशासन को उम्मीद है कि नए शावकों के स्वस्थ विकास के साथ आने वाले वर्षों में एशियाई शेरों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को और सफलता मिलेगी।
