भारत में राम मंदिर और पाकिस्तान में दाता दरबार—दोनों ही आस्था के बड़े केंद्र हैं, जहाँ हर साल करोड़ों रुपये के चढ़ावे आते हैं।

धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और दान हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी ने एक बार फिर से इस बात पर ध्यान खींचा है कि धार्मिक संस्थान भारी मात्रा में मिलने वाले दान का प्रबंधन कैसे करते हैं. जिस तरफ अयोध्या के मंदिर को पूरे भारत से भक्तों से भारी मात्रा में चढ़ावा मिलता है वहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी सूफी दरगाह, लाहौर में दाता दरबार को भी हर साल नकद, सोना, विदेशी मुद्रा और लंगर के रूप में अरबों पाकिस्तानी रुपये का दान मिलता है.
पाकिस्तान का दाता दरबार: दान का बड़ा केंद्र
पाकिस्तान के लाहौर में स्थित हजरत दाता गंज बख्श अली हुजविरी को समर्पित दाता दरबार दक्षिण एशिया के सबसे प्रमुख सूफी धार्मिक स्थलों में से एक है।
यह दरगाह 1960 में राष्ट्रीयकरण के बाद पंजाब सरकार के औकाफ और धार्मिक मामलों के विभाग के नियंत्रण में आ गई। यहां किसी निजी ट्रस्ट के बजाय सरकारी प्रशासन दान और प्रबंधन का कार्य संभालता है।
दान की निगरानी कैसे होती है?
दरगाह को हर साल भक्तों से भारी मात्रा में नकद, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा मिलती है. पूरे परिसर में 44 से ज्यादा दान पेटी रखी गई हैं. ये पेटियां सिर्फ अधिकृत सरकारी अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ही खोली जाती हैं. गिनती की प्रक्रिया की निगरानी सीसीटीवी सर्विलेंस के जरिए की जाती है और साथ ही जमा की गई राशि सीधे सरकारी खातों में जमा की जाती है. पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए पंजाब सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड ने एक ऑनलाइन नजराना पोर्टल भी शुरू किया है. यह दुनिया भर के भक्तों को बैंकिंग सेवा और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके डिजिटल रूप से योगदान करने की सुविधा देता है.
सालाना अरबों का दान और अन्य आय स्रोत
सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार दाता दरबार को केवल चढ़ावे से ही सालाना लगभग 300 से 400 मिलियन पाकिस्तानी रुपये की आय होती है। इसके अलावा दरगाह परिसर के आसपास मौजूद संपत्तियों और दुकानों से भी आय होती है।
औकाफ विभाग के पास यहां 300 से अधिक दुकानें और प्रॉपर्टी हैं, जिनसे किराए के रूप में अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है।
लंगर व्यवस्था: लाखों लोगों को भोजन
दाता दरबार में चलने वाली लंगर सेवा इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। यहां रोजाना लगभग 30,000 से 60,000 लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। सालाना उर्स के दौरान यह संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि पाकिस्तान और पड़ोसी देशों से श्रद्धालु आते हैं.
श्रद्धालु और सरकारी व्यवस्था मिलकर इस सेवा को चलाते हैं। इसमें आटा, चावल, तेल, दाल और अन्य खाद्य सामग्री का योगदान भी दान के रूप में आता है।
मल्टी लेयर सिक्योरिटी से दरगाह की सुरक्षा
क्योंकि दाता दरबार को पहले सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा है और साथ ही यहां साल भर भारी भीड़ रहती है, इस वजह से यहां सुरक्षा के करीब इंतजाम किए गए हैं. दरगाह की निगरानी हाईटेक सीसीटीवी कंट्रोल रूम से की जाती है. पंजाब पुलिस, एलिट फोर्स और औकाफ विभागों के कर्मचारी मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखते हैं. आने वाले लोगों की जांच के लिए एंट्री पॉइंट्स पर वॉक-थ्रू मेटल डिटेक्टर और आधुनिक स्कैनिंग उपकरण लगाए गए हैं.
